दिल्ली व हरियाणा में बेरोजगारी के आंकड़े चौकानें वाले स्तर पर

कोरोना महामारी ने लाखों लोगों की जिंदगी को बुरी तरह से प्रभावित किया है. जिसके चलते उनकी जिंदगी पटरी पर लौटने का नाम नहीं ले रही. उन्हें भी लॉकडाउन ने घर पर बैठने को मजबूर कर दिया जो प्रति दिन की अपनी मजदूरी से दो वक्त के खाने का प्रबंध कर पाते थे. इसी तरह और भी लाखों लोग जो निजी सेक्टर में कार्यरत थे, उन्हें इस आर्थिक मंदी ने बेरोजगारों की सूची में शामिल कर दिया है.

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क्या कहती है सीएमआईई की रिपोर्ट?

सीएमआईई (सेंटर फॉर मोनिटरिंग इंडियन इकोनोमी) ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है जिसके अनुसार इस संक्रमण के दौर में लगभग 85 प्रतिशत घरों की आमदनी में गिरावट दर्ज की गई है जो वाकई चिंताजनक है. इसके आंकड़ों के मुताबिक अब पूरे देश में लॉकडाउन खुलने के बाद बेरोजगारी की दर 7.93% प्रतिशत के लगभग है जो मार्च के बाद मई तक आते आते 25.9% तक पहुंच गई थी. वहीं शहरी आबादी में बेरोजगारी की यह डर अधिक है जो कि 9.65 % जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर कम होकर 7.13 फीसदी हो गयी है.

क्या है राजधानी दिल्ली और हरियाणा की स्थिति?

वैसे तो अनलॉक की प्रक्रिया के दौरान कुछ परिवहन एवं कुछ सम्बंधित लोगों को राहत मिली है जिसका असर प्रदेश में भी देखने को मिल रहा है. परन्तु बेरोजगारी का दंश अभी भी कम नहीं है क्योंकि राजधानी दिल्ली में अभी भी बेरोजगारी की दर 20.3% बनी हुई है. यानि कि दिल्ली की जनसंख्या के हर पांचवे व्यक्ति को रोजगार की तलाश है जिससे वह अपना जीवन निर्वाह कर सके. वहीं हरियाणा की स्थिति इस मामले में और भी दयनीय है. यहाँ बेरोजगारी दर 24.5% है जिसके अनुसार प्रदेश का हर चौथा युवा नौकरी की तलाश में है. अतः आंकड़े अगर सही हैं तो हरियाणा इस सूची में टॉप राज्यों में स्थान रखता है. क्योंकि गुजरात, ओडिशा में यह दर मात्र 1.9%, राजस्थान में 15.1%, तमिलनाडु में 8.1%, हिमाचल में 18.6%, जम्मू में 11.2%, झारखंड में 8.8%, पुडुचेरी में 21% है. अतः उपर्युक्त आंकड़ों को देखते हुए हरियाणा अग्रणी स्थान रखता है.

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स्किल डेवलपमेंट डिप्लोमा कितना असरकारक ?

कौशल विकास एवं उधमिता मंत्रालय ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु कई कार्यक्रम चलाए हैं. जिसके तहत युवा प्रशिक्षित होकर अपने कुटीर उद्योग खोल रहे हैं अथवा किसी ऐसे कार्य को कर रहे हैं जिनमे उनकी विशेष रूप से रूचि है. अतः इससे वो घर पर रहकर भी अपना जीवन निर्वाह करने में सफल रहे हैं जो एक सकारात्मक परिणाम है.

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