चंडीगढ़ | राजधानी में प्रशासन ने कर्मचारियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यस्थल पर सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए चंडीगढ़ ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (OSH) नियम- 2026 का ड्राफ्ट तैयार किया है. प्रस्तावित नियम लागू होने के बाद किसी भी कंपनी, फैक्ट्री या व्यावसायिक प्रतिष्ठान में महिला कर्मचारी से उसकी लिखित सहमति के बिना रात की ड्यूटी नहीं कराई जा सकेगी. नियोक्ता को महिला कर्मचारियों के लिए घर से कार्यस्थल तक मुफ्त पिक- अप और ड्रॉप की व्यवस्था करनी होगी. फिलहाल, यह ड्राफ्ट सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया गया है. लोगों की राय लेने के बाद इसे अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा. नए नियमों के अनुसार, किसी भी कर्मचारी को बिना नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) के नौकरी पर नहीं रखा जा सकेगा.

जिन कर्मचारियों को अब तक अपॉइंटमेंट लेटर नहीं मिला है, उन्हें नियम लागू होने के तीन महीने के भीतर यह देना अनिवार्य होगा. नियुक्ति पत्र में कर्मचारी का पद, वेतन, भत्ते, जन्मतिथि, कौशल श्रेणी और EPFO-ESIC जैसी सुविधाओं का उल्लेख करना होगा. ड्राफ्ट में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए कई अहम प्रावधान किए गए हैं.
इन बातों का ध्यान
- रात की ड्यूटी के लिए लिखित सहमति जरूरी होगी.
- कंपनी को मुफ्त पिक-अप और ड्रॉप सुविधा देनी होगी.
- कार्यस्थल, वॉशरूम और आने-जाने के रास्तों पर पर्याप्त रोशनी और CCTV की व्यवस्था करनी होगी.
- गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को खतरनाक कार्यों में नहीं लगाया जाएगा.
- भूमिगत खदानों में एक समय पर कम से कम तीन महिला कर्मचारियों की मौजूदगी अनिवार्य होगी.
सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं
प्रस्तावित नियमों के अनुसार किसी भी कर्मचारी से सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जा सकेगा. यदि इससे अधिक काम कराया जाता है तो सामान्य मजदूरी की दोगुनी दर से ओवरटाइम भुगतान करना होगा. साथ ही, लगातार 5 घंटे काम के बाद कम से कम 30 मिनट का विश्राम देना होगा. लगातार 7 दिन से अधिक ओवरटाइम नहीं कराया जा सकेगा. तीन महीने में अधिकतम 144 घंटे ओवरटाइम की सीमा तय की गई है. 40 साल से अधिक उम्र वालों का सालाना मेडिकल चेकअप
नए नियमों के तहत 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र के कर्मचारियों का साल में एक बार मुफ्त मेडिकल चेकअप कराया जाएगा. वहीं खतरनाक उद्योगों में कार्यरत कर्मचारियों की हर छह महीने में स्वास्थ्य जांच कराना अनिवार्य होगा.
सेफ्टी कमेटी होगी अनिवार्य
सभी संस्थानों को श्रम विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा. आवेदन पूरा होने के सात कार्य दिवस के भीतर रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा. इसके अलावा, 500 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों और खतरनाक उद्योगों में सेफ्टी कमेटी बनाना अनिवार्य होगा, जिसमें प्रबंधन और कर्मचारियों के समान प्रतिनिधि होंगे. 100 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस लगाने के तुरंत बाद कर्मचारी के मोबाइल पर एंट्री और एग्जिट का SMS भेजा जाएगा. इससे उपस्थिति में गड़बड़ी की संभावना कम होगी.
ESIC लाभ
ड्राफ्ट के अनुसार केवल वही व्यक्ति आश्रित माना जाएगा जिसकी सभी स्रोतों से मासिक आय 15,000 रुपये या उससे कम होगी. ऐसे आश्रितों को ESIC के तहत मुफ्त इलाज, दवाइयां, जांच और अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी. दुर्घटना, विकलांगता या कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में पात्र आश्रितों को आर्थिक सहायता और अन्य लाभ भी उपलब्ध कराए जाएंगे.
होंगे ये फायदे
- महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और नाइट शिफ्ट के लिए स्पष्ट नियम.
- सभी कर्मचारियों के लिए अपॉइंटमेंट लेटर अनिवार्य.
- 48 घंटे से अधिक काम पर दोगुना ओवरटाइम.
- नियमित मेडिकल जांच की सुविधा.
- बायोमेट्रिक अटेंडेंस पर SMS अलर्ट.
- बड़े संस्थानों में सेफ्टी कमेटी का गठन.
- ESIC लाभों का स्पष्ट दायरा.
- कार्यस्थल पर सुरक्षा और पारदर्शिता में बढ़ोतरी.