चंडीगढ़ | हरियाणा में जल्द ही न्यूनतम मजदूरी की दरों में संशोधन होने वाला है. इसके लिए सरकार द्वारा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. 5 साल की देरी के बाद इस विषय में प्रक्रिया आगे बढ़ी है. इससे पहले 2015 में इसे संशोधित किया जाना था. साल 2020 में इसमें बदलाव होना था, अब राज्य सरकार (Haryana Govt) द्वारा न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन को लेकर जांच करने और सलाह देने के लिए समिति और उप समिति का गठन कर दिया गया है.
यह रहेंगे कमेटी में शामिल
जॉइंट लेबर कमिश्नर परमजीत सिंह को इस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है. इस कमेटी में सरकार की ओर से लेबर, फाइनेंस या प्लानिंग डिपार्टमेंट के दो अधिकारी भी शामिल रहेंगे. कर्मचारियों की तरफ से इसमें जे. एन. मंग्ला, रमन सलुजा, विनोद गुप्ता, सुखदेव सिंह और एस. एस. सरोहा और वर्करों की तरफ से सुरेखा, अशोक कुमार, अनिल पवार, नसीम जाखड़ व सूर्य देव शामिल रहेंगे. बीएमएस के जोनल ऑर्गेनाइजेशन सेक्रेटरी पवन कुमार को इसमें सब्जेक्ट एक्सपर्ट के तौर पर शामिल किया गया है. वहीं, डेप्युटी लेबर कमिश्नर विश्वजीत सिंह हुड्डा को उप समिति का अध्यक्ष बनाया गया है.
50 लाख लोगों को होगा लाभ
इसका कमेटी में कर्मचारियों की तरफ से प्रमोद गुप्ता और अजीत यादव तथा वर्करों की तरफ से विनोद कुमार और रमेश चंद्र महरानियां को शामिल किया गया है. पवन कुमार को सब्जेक्ट एक्सपर्ट के तौर पर रखा गया है. इस समिति का कार्यकाल 2 साल का रखा गया है. ऐसा माना जा रहा है कि न्यूनतम मजदूरी दर बढ़ने से 50 लाख से ज्यादा लोगों को फायदा मिलेगा. यह समिति प्रदेश के आसपास के राज्यों में मजदूरी संरचना का विश्लेषण करेगी. साथ ही, हितधारकों से भी मंत्रणा करेगी. इसके बाद 90 दिनों में कमेटी अपनी सिफारिश को पेश करेगी.
