फरीदाबाद | हरियाणा सरकार की प्रोत्साहन नीति की बदौलत आज सूबे के किसान परम्परागत खेती का मोह त्याग कर बागवानी और ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं. इसी कड़ी में फरीदाबाद जिले के गांव डीग निवासी किसान पन्ना आजकल हाईब्रिड खीरे की खेती से चौतरफा सुर्खियों में छाए हुए हैं. उनके खेत में दूर-दूर तक नजर आ रही बेलों पर लटकते हुए चमकदार खीरे सभी को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं. रंग और आकार में बिल्कुल हटके दिख रहे ये खीरे पहली नजर में ही समझ में आ जाते हैं कि उत्तम क्वालिटी की फसल लगी हुई है.
बिहार के रहने वाले किसान पन्ना ने बताया कि गांव में खेती से उचित आमदनी नहीं होने पर वह फरीदाबाद आ गए थे. यहां एक एकड़ जमीन पट्टे पर लेकर हाईब्रिड खीरे की खेती करना शुरू कर दिया. यह वैरायटी टॉप क्लास है और बाजार में ऊंचे भाव पर बिक्री हो जाती है.
हाईब्रिड खीरे की खेती की विधि
हाईब्रिड खीरे की खेती की तैयारियों को लेकर पन्ना ने बताया कि पहले एक बार कंटी चलाते हैं और फिर रोटावेटर से मिट्टी को दो-तीन बार बढ़िया तरीके से तैयार किया जाता है. उसके बाद लाइन बनाकर एक-एक फीट की दूरी पर दो-दो बीज डाले जाते हैं. इसके बाद कुछ ही दिनों में पूरा खेत बेलों से भर जाता है. उन्होंने बताया कि हाईब्रिड बीज महंगा जरुर पड़ता है लेकिन उत्तम क्वालिटी और बंपर पैदावार से पूरा खर्च निकलने के साथ-साथ अच्छी आमदनी हो जाती है.
लागत और प्रोफिट का पूरा गणित
उन्होंने बताया कि एक एकड़ जमीन पर हाईब्रिड खीरे की खेती पर खाद- बीज, कीटनाशक दवाओं आदि का मिलाकर लगभग 35 हजार रुपए खर्च आ जाता है. परंतु एक सीजन में ढाई से तीन लाख रुपए की फसल निकल आती है. जब खीरा तैयार हो जाता है तो बिक्री के लिए बल्लभगढ़ मंडी लेकर जाते हैं. कई बार खेत से ही ज्यादातर खीरे की बिक्री हो जाती है.
उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में हर तीसरे या चौथे दिन सिंचाई करनी पड़ती है. यदि फसल में कीड़ा या अन्य कोई रोग आ जाता है तो समय पर देखभाल करते हुए कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करना पड़ता है वरना पूरी बेल बर्बाद हो जाती है. हाईब्रिड खेती में देखभाल थोड़ी ज्यादा करनी पड़ती है परंतु आमदनी भी उतनी ही बढ़िया मिलती है.
पन्ना ने बताया कि फरीदाबाद में रहकर हाईब्रिड खेती करते हुए वह न केवल अपने परिवार का पालन- पोषण कर रहे हैं बल्कि इस कमाई से दो बेटियों की शादी भी कर चुके हैं. उन्होंने अन्य किसानों से भी परम्परागत खेती का मोह त्यागने की सलाह देते हुए बागवानी और ऑर्गेनिक खेती करने की बात कही है ताकि कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकें.
