फरीदाबाद | हरियाणा के फरीदाबाद जिले में चल रहे सूरजकुंड मेले (Surajkund Mela) में इस बार भी देश- विदेश के कलाकार अपनी अनोखी कलाकृतियों का प्रदर्शन कर रहे हैं. कला, संस्कृति और मनोरंजन का यह अनूठा संगम लोगों को आकर्षित कर रहा है. इसी मेले में हरियाणा की अंजू भी अपने स्टॉल के जरिए हरियाणवी संस्कृति से लोगों को परिचित कराने का प्रयास कर रही हैं. वह अपने हाथों से दामन, कुर्ती और चुन्नी तैयार करती हैं और उन पर खूबसूरत पारंपरिक डिजाइन बनाती हैं.
पारंपरिक पहनावे को जीवंत करने का संकल्प
अंजू का कहना है कि आधुनिकता के दौर में पारंपरिक परिधान अब कम ही देखने को मिलते हैं, खासकर शहरों में. इसलिए उन्होंने ठाना है कि पूर्वजों के परिधानों को जिंदा रखा जाए. वह बताती हैं, “मैं मूल रूप से बहादुरगढ़ की रहने वाली हूं और पिछले 4 सालों से इस काम में लगी हुई हूं. पुराने डिजाइनों को नए अंदाज में तैयार कर रही हूं.” हरियाणा का पारंपरिक परिधान दामन (घाघरा), कुर्ता और चुन्नी होता है, जिस पर हाथों से कढ़ाई और डिज़ाइन बनाए जाते हैं. दामन और चुन्नी पूरी तरह हाथ से तैयार किए जाते हैं, जिससे इनकी सुंदरता और निखरती है.”
परिवार और टीम का मिल रहा साथ
अंजू इस काम में अकेली नहीं हैं, बल्कि उनका पूरा परिवार और टीम उनका सहयोग करता है. वह बताती हैं कि पहले के समय में माताएं और दादियां जो आभूषण पहनती थीं, वे आज के समय में कम ही नजर आते हैं. उन्होंने हरियाणा के पारंपरिक चांदी के आभूषणों, जिन्हें हसली कहा जाता है, को अब भी सुरक्षित रखा है. उनके स्टॉल पर आने वाले लोग हाथ से बने परिधानों की खूब तारीफ कर रहे हैं.
अंजू कहती हैं कि उनका मकसद सिर्फ कपड़े बेचना नहीं, बल्कि हरियाणवी संस्कृति को फिर से जीवित करना है. वह अपनी पुरानी परंपरा और विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का काम कर रही हैं.
