9 अप्रैल से शुरू हो रही चैत्र नवरात्रि, जानिये घट स्थापना से लेकर पूजा- अर्चना करने तक की पूरी विधि

ज्योतिष | सनातन धर्म में चैत्र नवरात्रि को विशेष महत्व प्राप्त है, वैसे तो साल में 4 बार नवरात्रि आती है. इसमें से 2 गुप्त नवरात्रि और 1 चैत्र नवरात्रि और 1 शारदीय नवरात्रि है. हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है, जो नवमी तिथि को समाप्त हो जाती है. इस दौरान मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की विधि- विधान से पूजा की जाती है.

Navratri 2021

मान्यता है कि इन 9 दिनों में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की विधि विधान तरीके से पूजा अर्चना के साथ व्रत रखने से व्यक्ति को अपने जीवन में तमाम तरह के दुखों से छुटकारा मिल जाता है. साथ ही, सुख- समृद्धि के पर प्राप्ति होती है.

कब से शुरू हो रहे चैत्र नवरात्रि?

इस साल पूरे 9 दिन नवरात्रि पड रहे हैं. आज की इस खबर में हम आपको बताएंगे कि नवरात्रि कब से शुरू हो रहे हैं और कलश स्थापना करने का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है. चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि का आरंभ 8 अप्रैल 2024 को रात 11:50 मिनट से शुरू हो रहा है और चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि समाप्त 9 अप्रैल को रात 8:30 मिनट पर हो रही है. ऐसे में चैत्र नवरात्रि 9 अप्रैल 2024 से ही आरंभ होगी. वहीं, घट स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6:11 मिनट से लेकर 10:30 मिनट तक रहने वाला है.

नवरात्रि पर बना रहे कई शुभ संयोग

हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि के पहले दिन यानी कि 9 अप्रैल को अमृत सिद्धि के साथ- साथ स्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है. दोनों ही शुभ योग 9 अप्रैल को सुबह 7:32 मिनट से लेकर 10 अप्रैल को सुबह 5:06 मिनट तक रहने वाले हैं. नवरात्रों में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा- अर्चना करने का विशेष महत्व बताया गया है. अगर हम विधि- विधान तरीके से पूजा अर्चना करते हैं तो हम काफी आसानी से मां को प्रसन्न कर लेते हैं.

कब है अष्टमी और नवमी?

हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है. इन दोनों विधि- विधान तरीके से पूजा करने से सुख- समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. 15 अप्रैल को माहा सप्तमी है, इस दिन रात में निशा पूजा होती है. वहीं, 16 अप्रैल को महाअष्टमी की पूजा होगी. 17 अप्रैल को रामनवमी है. इस दिन अखंड कीर्तन किया जाता है. 18 अप्रैल को दशमी है. घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6:12 मिनट से शुरू होकर 10:30 मिनट तक रहने वाला है.

इस प्रकार करें घट स्थापना

घट स्थापना मंदिर के उत्तर- पूर्व दिशा में करना काफी अच्छा माना जाता है. मां की चौकी लगाकर कलश को स्थापित करना चाहिए, इसके लिए सबसे पहले आपको उस स्थान को गंगाजल छिड़कर पवित्र कर लेना है. फिर लकड़ी की चौकी पर लाल रंग से स्वास्तिक बनाएं और कलश को वहां पर स्थापित कर दे. कलश में आप आम का पत्ता भी रख सकते हैं. इसके साथ एक सुपारी, कुछ सिक्के, दूर्वा, हल्दी की गाठ कलश में अवश्य डालें.

कलश के मुख पर एक नारियल लाल वस्त्र से लपेट कर रखें. कलश स्थापना के बाद ही अखंड दीपक की भी स्थापना की जाती है. उसके बाद, पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. वहीं, आपको हाथ में लाल फूल और चावल लेकर मां शैलपुत्री का ध्यान करके मंत्रों का जाप करना चाहिए.

मां दुर्गा के इन 9 स्वरूपों की होती है पूजा

  • पहला चैत्र नवरात्रि (09 अप्रैल 2024, मंगलवार) – मां शैलपुत्री पूजा, घटस्थापना
  • दूसरा चैत्र नवरात्रि (10 अप्रैल 2024, बुधवार) – मां ब्रह्मचारिणी पूजा
  • तीसरा चैत्र नवरात्रि (11 अप्रैल 2024, गुरुवार) – मां चंद्रघंटा पूजा
  • चौथा चैत्र नवरात्रि (12 अप्रैल 2024, शुक्रवार) – मां कुष्मांडा पूजा
  • पांचवां चैत्र नवरात्रि (13 अप्रैल 2024, शनिवार) – मां स्कंदमाता पूजा
  • छठा चैत्र नवरात्रि (14 अप्रैल 2024, रविवार) – मां कात्यायनी पूजा
  • सातवां चैत्र नवरात्रि (15 अप्रैल 2024, सोमवार) – मां कालरात्रि पूजा
  • आठवां चैत्र नवरात्रि (16 अप्रैल 2024, मंगलवार) – मां महागौरी पूजा और दुर्गा महा अष्टमी पूजा
  • नौवां चैत्र नवरात्रि (17 अप्रैल 2024, बुधवार) – मां सिद्धिदात्री पूजा, महा नवमी और रामनवमी
  • दसवां दिन नवरात्रि (18 अप्रैल 2024, गुरुवार) – दुर्गा प्रतिमा विसर्जन

डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. Haryana E Khabar इनकी पुष्टि नहीं करता है.

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