करनाल | देशभर में गेहूं उत्पादक किसानों के लिए एक जरूरी खबर सामने आई है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के करनाल स्थित भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) किसानों के लिए 15 जनवरी तक एडवाइजरी जारी की है. ICAR के कृषि वैज्ञानिकों ने बताया है कि अनुकूल मौसम के चलते गेहूं की फसल में वानस्पतिक वृद्धि और फुटाव काफी अच्छा नजर आ रहा है.
इन बातों का रखें ध्यान
कृषि संस्थान का कहना है कि हालिया दिनों में उत्तर भारत में हुई बारिश को देखते हुए गेहूं की फसल में अच्छी वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रति एकड़ 40 किलोग्राम यूरिया का छिड़काव करें. जिन क्षेत्रों में बारिश नहीं हुई है, वहां जल्द- से- जल्द सिंचाई करें, ताकि तापमान बहुत कम होने के कारण होने वाले नुक़सान से फसल का बचाव किया जा सकें.
संस्थान ने सलाह दी है कि गेहूं की फसल में यदि पीलापन नजर आ रहा है, तो अधिक मात्रा में नाईट्रोजन का उपयोग न करें. पीला रतुआ संक्रमण के लिए फसल का नियमित रूप से निरीक्षण करें और रोग के लक्षण मिलने पर निकटवर्ती संस्थान, कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विज्ञान केंद्रों से संपर्क कर सलाह लें. यूरिया का छिड़काव सिंचाई करने से पहले करें. खरपतवार प्रबंधन और दीमक पर नियंत्रण रखने पर ध्यान दें.
कृषि विशेषज्ञों की सलाह जरूरी
संस्थान के निदेशक डॉ. रतन तिवारी ने बताया कि पीला रतुआ के लिए अनुकूल मौसम और इसके फैलने को ध्यान में रखते हुए नियमित रूप से फसल का निरीक्षण करते रहें. यदि गेहूं में इस रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लें. कभी-कभार अन्य कारणों से भी पतियां पीली हो जाती है. इसलिए विशेषज्ञों की सलाह पर ही कीटनाशक छिड़काव या अन्य कोई उपचार करें.
