नई दिल्ली | अर्बन एक्सटेंशन रोड- 2 (UER- II) के दोनों तरफ 250- 250 मीटर चौड़े ‘हाई- डेंसिटी कॉरिडोर’ के विकास की योजना के साथ अब इस एक्सप्रेसवे की रफ्तार बनाए रखने पर भी जोर दिया जा रहा है. व्यावसायिक गतिविधियां और घनी आबादी बढ़ने के बाद एक्सप्रेसवे पर जगह- जगह कट, पार्किंग और बढ़ते ट्रैफिक के कारण जाम की स्थिति न बने इसके लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने मास्टर प्लान 2047 के तहत ‘बफर और नियंत्रित एक्सेस मॉडल’ तैयार किया है.

इस मॉडल का उद्देश्य यूईआर- II पर तेज और सिग्नल- फ्री यातायात बनाए रखने के साथ इसके आसपास विकसित होने वाली नई टाउनशिप को भी बेहतर कनेक्टिविटी देना है. UER- II की मुख्य लेन और आसपास बनने वाली इमारतों के बीच स्पष्ट दूरी रखी जाएगी.
लगाएं साउंड बैरियर
एक्सप्रेसवे के किनारे चौड़ी ग्रीन बेल्ट विकसित करने के साथ साउंड बैरियर भी लगाए जाएंगे. इससे वाहनों का शोर, धूल और प्रदूषण आसपास की रिहायशी आबादी तक कम पहुंच सकेगा. इसके अलावा, किसी भी कमर्शियल या रिहायशी परिसर को एक्सप्रेसवे की मुख्य लेन से सीधे जोड़ने की अनुमति नहीं होगी. परिसरों में आने- जाने वाले वाहनों के लिए समानांतर सर्विस रोड का इस्तेमाल करना होगा.
5 किमी पर होंगे इंटरचेंज
एक्सप्रेसवे पर अवैध कट और अनियंत्रित प्रवेश-निकास रोकने के लिए केवल निर्धारित स्थानों से ही वाहनों को प्रवेश और बाहर निकलने की सुविधा मिलेगी. इसके लिए करीब 3 से 5 किमी की दूरी पर विशेष इंटरचेंज बनाए जाएंगे. इनके बीच कहीं भी सीधे कट देने की अनुमति नहीं होगी. इस व्यवस्था से मुख्य एक्सप्रेसवे लेन पर अचानक वाहनों के प्रवेश से होने वाले ट्रैफिक दबाव को कम करने में मदद मिलेगी.
अंडरग्राउंड पार्किंग
हाई- डेंसिटी कॉरिडोर में पार्किंग व्यवस्था को लेकर भी सख्त प्रावधान किए गए हैं. न्यूनतम 4,000 वर्ग मीटर वाले बड़े भूखंडों पर बनने वाले परिसरों में पूरी पार्किंग भूमिगत रखना अनिवार्य होगा. सर्विस रोड या एक्सप्रेसवे पर वाहनों की पार्किंग की अनुमति नहीं होगी. ऐसे मामलों में डिजिटल चालान के जरिए कार्रवाई की जाएगी. डीडीए के इस बफर और नियंत्रित एक्सेस मॉडल से यूईआर- II पर सिग्नल- फ्री यातायात बनाए रखने की कोशिश की जा रही है. साथ ही इसके आसपास बढ़ती आबादी के लिए आधुनिक शहरी सुविधाओं के साथ नई टाउनशिप विकसित करने की योजना है.