नई दिल्ली | भारतीय रेलवे (Indian Railways) निरंतर सफलता के नए आयाम स्थापित कर रहा है. इसी कड़ी में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए रेलवे ने देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली ट्रेन का सफल ट्रायल कर लिया है. यह ट्रायल चेन्नई स्थित इंटिग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में हुआ. यह ऐतिहासिक उपलब्धि न सिर्फ भारत के रेलवे इतिहास में नया अध्याय जोड़ेगी, बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रखेगी. खास बात यह है कि यह तकनीक पूरी तरह से स्वदेशी है, जिसे चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) ने विकसित किया है.
जल्द ट्रैक पर होगी हाइड्रोजन ट्रेन
रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है. भारत अब 1200 हॉर्सपावर की हाइड्रोजन ट्रेन पर भी काम कर रहा है. इस सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों जैसे स्वीडन, जर्मनी, चीन और फ्रांस की लिस्ट में शामिल हो गया है, जहां हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली ट्रेनों की तकनीक मौजूद है.
हरियाणा में दौड़ेगी पहली हाइड्रोजन ट्रेन
रेलवे ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत हरियाणा के जींद- सोनीपत रेल खंड पर 89 किलोमीटर की दूरी पर इस ट्रेन का ट्रायल किया है. इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 111.83 करोड़ रुपये बताई जा रही है. 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली इस ट्रेन को जल्द ही नियमित रूप से चलाया जा सकता है.
सूत्रों के मुताबिक, नॉर्दर्न रेलवे के इस रूट पर 8 कोच वाली नॉन- एसी हाइड्रोजन ट्रेन चलेगी, जिसमें दोनों तरफ हाइड्रोजन फ्यूल पावर कार होगी. बताया जा रहा है कि ICF 31 अगस्त तक इस ट्रेन की पहली डिलीवरी देने की तैयारी में है. हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित ये ट्रेनें हाइड्रोजन गैस और ऑक्सीजन के रासायनिक रिएक्शन से बिजली पैदा करती हैं, जो ट्रेन को चलाने में मदद करती है. इस प्रक्रिया में उप- उत्पाद के रूप में सिर्फ पानी और भाप निकलती है, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है.
