नई दिल्ली | गर्मियों के मौसम में लोग अपने फैमिली मेंबर्स के साथ घूमना फिरना पसंद करते हैं. लोग झीलों, पहाड़ों या हरी भरी वादियों में परिवार के साथ समय बिताना पसंद करते हैं. इन गर्मी की छुट्टियों में यदि आपका भी कहीं घूमने जाने का मन है तो आज हम आपको राजधानी दिल्ली की कुछ ऐसी जगह के बारे में जानकारी देंगे, जहां अब बिना ज्यादा पैसे और समय खर्च किए आसानी से पहुंच सकते हैं.
बॉर्डर पर बसी यह झीलें
हरियाणा, दिल्ली बॉर्डर पर एक झील है, जिसका कुछ हिस्सा दिल्ली के तुगलकाबाद में और कुछ हिस्सा फरीदाबाद में लगता है. जो हिस्सा दिल्ली में आता है, उसे नीली झील कहते हैं. जो हिस्सा हरियाणा में आता है, उसे भारद्वाज लेक के नाम से जाना जाता है. इन दोनों झीलों को ‘डेथ वैली’ भी कहते हैं. जो लोग प्राकृतिक सुंदरता और शांति की तलाश में हैं, उनके लिए असोला भट्टी वन्य जीव अभ्यारण में मौजूद नीली झील सही विकल्प हो सकती है. 32 किलोमीटर में फैली इस झील के आसपास का वातावरण आपका मन मोह लेगा. सैलानियों के लिए यह जगह घूमने के लिहाज से काफी खास साबित हो सकती है.
ऐसे बनी यह झीलें
असोला भट्टी वन्य जीव अभ्यारण्य में मौजूद इन झीलों के बारे में कहा जाता है कि एक बार यहां बलुआ पत्थर, चूना और बदरपुर की अवैध माइनिंग हो रही थी. खनन इतना गहरा हो गया कि ग्राउंड वाटर लेवल तक पहुंच गए. तब लोग जल्दी- जल्दी से अपना सामान आदि छोड़कर यहां से भाग गए. काफी बरसात होने के बाद यहां झील बन गई और नीला पानी भर गया. इसके बाद, यहाँ कोरल लेक, CITM लेक 2, डॉल्फिन लेक और लेक भरद्वाज जैसी कई झीलों का निर्माण हो गया.
भारद्वाज लेक के नज़ारे भी ख़ास
हरियाणा के फरीदाबाद के पास दिल्ली हरियाणा बॉर्डर पर भारद्वाज लेक स्थित है. यह अरावली पहाड़ियों की चट्टानों, कंकड़ और बजरी से घिरी हुई झील है जो सैलानियों के बीच काफी लोकप्रिय है. यहां अनेक प्रकार के वन्य जीव भी देखने को मिल जाते हैं. इनमें पक्षी, कीट, खरगोश, हिरण और नीलगाय भी शामिल हैं. झील तक आने के लिए छोटी सड़कों का निर्माण किया गया है. बताते चले कि इस झील का नाम ऋषि भारद्वाज के नाम पर नहीं बल्कि खदान के ठेकेदार के नाम पर रखा गया है.
