दलित परिवार का SC/ST एक्ट केस वापस लेने से इंकार, गाँव में हो रहा दलित समुदाय का सामाजिक बहिष्‍कार

रोहतक | इन दिनों रोहतक जिले के भैणी मातो गांव में दलित समुदाय के साथ बुरा व्यवहार हो रहा है.  दलित परिवार को अपना रोजमर्रा का सामान लेने गाँव से करीब आठ किलोमीटर चलकर जाना पड़ रहा है. इन सबकी वजह है एक उच्च जाति के युवक द्वारा घर में घुसकर नाबालिग दलित लड़की के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ के बाद उसके परिवार द्वारा युवक के खिलाफ एससी/एसटी एक्‍ट (SC/ST Act) और पोक्‍सो एक्‍ट (POCSO ACT) के तहत दर्ज केस को वापस लेने से इंकार कर देना है. यानि अब गाँव के लोग दलित समुदाय का सामाजिक बहिष्‍कार कर रहे है.

Police

बता दें 7 दिसंबर की रात को कुलदीप उर्फ भोलू बुरी नीयत से अपनी भतीजी के घर में घुस गया. कमरे में उस समय लड़की के माता पिता, भतीजा व सत्रह साल की भतीजी सो रहे थे. कुलदीप उसकी भतीजी से छेड़छाड़ करने लगा. उसी समय लड़की ने शोर मचा दिया. और सभी की आंखे खुल गई. परिवारीजनों ने उसी समय कुलदीप को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया.

इसके बाद लड़की के परिवार ने SC/ST एक्ट को मिलाकर अन्य धाराओं के साथ आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया. इसके बाद 8 दिसंबर को गांव में एक पंचायत आयोजित की गई थी. जिसमे पीड़िता के परिवार से केस वापिस लेने का दवाब बनाया गया था. इसके बाद परिवारवालों ने इससे मना कर दिया था. जिसके बाद दो और पंचायतें कराई गईं और पूरे समुदाय का बहिष्कार करने की घोषणा की गई.

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परिवारजनों और स्थानीय लोगो का आरोप

इसके साथ ही स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि 15 दिसंबर को गांव में एक घोषणा की गई थी, गाँव का कोई भी व्यक्ति इनसे बोलचाल नहीं करेगा और न ही किसी तरह का संबंध रखेगा. और न ही इन परिवारों के सदस्यों को खेत, घर व दुकान में प्रवेश नहीं करने देगा. यदि कोई ऐसा करता पाया गया तो उससे 11 हजार रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा.

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वही अब पीड़ित लड़की के 70 वर्षीय दादा ने TOI को बताया कि -“हम अपना केस वापिस नहीं लेंगे, जब तक हमारा बहिष्कार करना है करें ये तीसरा मौका है जब आरोपी युवक जबरन हमारे घर में घुसा है. इसके साथ ही पीड़िता के दादा ने यह भी दावा किया है कि जब हम सामाजिक बहिष्‍कार किए जाने को लेकर पुलिस स्टेशन रिपोर्ट दर्ज कराने गए थे तो हमारी रिपोर्ट नहीं दर्ज की गई. पुलिस ने हमसे कहा कि वे खुद ये मामला सुलझा लें. शिकायत दर्ज कराने की कोई जरूरत नहीं.

इसके साथ ही दलित समाज की ही एक महिला ने TOI से कहा -“घोषणा के बाद से सभी दलित परिवारों का बहिष्कार हो रहा है. बीते चार दिनों से, हम बिना काम के हैं और पैसे का नुकसान भी हमको झेलना पड़ रहा है. वे कुछ भी कह सकते हैं और हमें बस चुप रहने को कहा जा रहा है.

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इस मामले में दलित मानवाधिकारों के लिए राष्ट्रीय गठबंधन के अधिवक्ता और समन्वयक रजत कलसन ने बहिष्कार को “अस्पृश्यता” का एक रूप करार देते हुए कहा -“आज समाज में छुआछूत को खत्म हुए 70 साल का समय बीत चुका है. लेकिन आज भी यह गांवों में सामाजिक बहिष्कार के रूप में लागू है. जिनमें हरियाणा के गाँव ये यह सामाजिक बहिष्कार बड़े पैमाने पर है, इसके बावजूद मीडिया का ध्यान इस ओर नहीं जाता है. आज भी रोहतक, हिसार, पंचकुला और जींद जिलों में सामाजिक बहिष्कार के अनेको मामले दर्ज है”

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