सोनीपत | राई क्षेत्र के गांव गढ़ शहजादपुर में राजेंद्र व बीरमति के घर 7 बेटियों ने जन्म लिया, 2 बेटियां बीमारी में चल बसीं. पिता राजेंद्र गजौर में एसईपीओ के पद पर तैनात थे. वे शिक्षा का महत्व समझते थे और उन्होंने मन में ठान लिया था कि समाज में बेटियों की शिक्षा बहुत आवश्यक है. 5 बेटियों में बड़ी पूनम, सुमन जो पीजीटी अंग्रेजी है. इसके बाद, नीतू जो पहले अंग्रेजी की लेक्चरर थे, ज्योति स्कूल में अध्यापिका है, रीना अभी तैयारी कर रही है.
मां ने बेटियों को महसूस नहीं होने दी कमी
2004 में पिता राजेंद्र बीमारी के कारण चल बसे, फिर बेटियों की जिम्मेवारी मां बीरमति पर आ गई. उन्होंने बेटियों की पढ़ाई का पूरा ध्यान रखा व पंचायत कार्यालय में एसईपीओ के पद पर एक्सोसिया के तहत नौकरी भी की. वह देर रात स्वयं बेटियों को पढ़ाती थी. सभी बहनों की पढ़ाई में अच्छी रुचि हो गई और अब 5 बहनों में से 2 बहनें पीएचडी हैं. बाकी सभी पोस्ट ग्रेजुएट हैं. नीतू 3 विषयों जिनमें मास्टर आफ इकोनोमिक, मास्टर ऑफ एजुकेशन व मास्टर ऑफ एलएलबी हैं व इकोनॉमिक विषय से पीएचडी होल्डर्स भी हैं.
इन तीनों ही विषयों में वह नेट क्वालीफाई भी हैं. जज बनने वाली नीतू की प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरदार पटेल स्कूल से हुई है. इसके बाद, उन्होंने जीवीएम स्नातकोत्तर व कुरुक्षेत्र विवि एलएलएम किया है. नीतू का कहना है कि कई बार पहले प्रयास में सफलता नहीं मिलती, तो ऐसे में कुछ बच्चे परेशान हो जाते हैं व तैयारी छोड़ देते हैं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए.
घर परिवार को संभालते हुए पाई सफलता
वे खुद भी पहले चरण में एग्जाम पास तो कर चुकी थी, लेकिन मैरिट में कुछ नंबरों से उनका चयन रह गया था. इस बार उनका अच्छे नंबरों से चयन हुआ है. उन्होंने घर परिवार संभालने के साथ व बच्चों की देखरेख करते हुए सफलता पाई है. अब वह स्कूल में प्राध्यापिका की ड्यूटी पर है. परीक्षा की तैयारी करने वालों को हमेशा तैयारी करते रहनी चाहिए और असफलता से घबराना नहीं चाहिए.
