जींद | देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन की उम्मीद लगाए बैठे लोगों का कड़ाके की ठंड ने इंतजार और बढ़ा दिया है. हाड़ कंपा देने वाली ठंड इस ट्रेन के संचालन में बाधा बन गई है. कम तापमान के कारण हाइड्रोजन गैस में नमी आ गई जिससे गैस में ऑक्सीजन की मात्रा रह गई. ऐसे में सुरक्षा मानकों को देखते हुए तकनीकी टीम ने तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए हैं.
हाइड्रोजन ट्रेन में समाधान करने पर जोर
अभी हाइड्रोजन गैस को सुखाने के साथ- साथ उसमें मौजूद ऑक्सीजन को पूरी तरह हटाने का काम किया जा रहा है. तकनीकी अधिकारियों के अनुसार, अभी मौजूदा हाइड्रोजन गैस से ऑक्सीजन को समाप्त करना और भविष्य में ठंड के मौसम में इस तरह की समस्या दोबारा न आए इसके लिए स्थायी तकनीकी समाधान तैयार किया जा रहा है.
इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही ट्रेन में दोबारा हाइड्रोजन गैस भरी जाएगी और अंतिम ट्रायल को लेकर फैसला लिया जाएगा. पिछले 11 दिनों से हाइड्रोजन प्लांट में ट्रेन का स्टेशनरी ट्रायल जारी है. इस दौरान ट्रेन की गहन तकनीकी जांच की जा रही है.
स्टेशनरी ट्रायल पूरा होने के बाद रनिंग ट्रायल किया जाएगा लेकिन उससे पहले ट्रेन की फिटनेस को लेकर सभी औपचारिक जांच पूरी की जाएगी. रेलवे अधिकारी किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते हैं इसलिए हर चरण को अत्यंत गंभीरता से पूरा किया जा रहा है. यही वजह है कि ट्रेन के संचालन में अपेक्षा से अधिक देरी हो रही है.
इस रूट पर होगी संचालित
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद से सोनीपत रूट पर संचालित होगी. 89 किलोमीटर लंबे इस रूट पर यह ट्रेन कुल 6 स्टेशनों जींद सिटी, पांडु- पिंडारा, भंभेवा, गोहाना, मोहाना और सोनीपत पर ठहराव करेगी. ट्रेन पूरी तरह प्रदूषण मुक्त होगी. इसमें डीजल या अन्य जीवाश्म ईंधन का उपयोग नहीं किया जाएगा जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी.
यह ट्रेन पूरी तरह से भारत में डिजाइन और विकसित की गई है. ब्रॉड गेज लाइन पर चलने वाली यह दुनिया की सबसे लंबी (10 कोच) और सबसे शक्तिशाली (2400 किलोवाट) हाइड्रोजन ट्रेन है.
