नई दिल्ली | आधार कार्ड से जुड़ी एक नई अपडेट सामने आई है. बता दें कि आधार कार्ड के तकनीकी ढांचे को सुरक्षित एवं पारदर्शिता बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है. लगभग 4 महीने के मैराथन चर्चा के बाद गठित विशेषज्ञ समिति ने ‘आधार विजन 2032’ के दस्तावेज तैयार किए है. इसके प्रारूप को अगले महीने समिति की बैठक में अंतिम रूप दिया जाएगा और मार्च में UIDAI को सौंपा जाएगा.

आधार कार्ड का नया प्रारूप
समिति द्वारा गठन आधार विजन 2032 में AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्लाकचेन और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने की सिफारिश की गई है. इसी विजन के अनुसार अगले 5 साल के लिए आधार कार्ड का नया प्रारूप तैयार किया जाएगा. इसका उद्देश्य आधार को ज्यादा साफ, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाना है ताकि धोखाधड़ी से बचा जा सके.
नए आधार विजन 2032 में फिंगरप्रिंट की बजाए फेशियल रिकग्निशन को प्राथमिकता दी जाएगी. इस नई व्यवस्था को बनाने के लिए अक्तूबर में UIDAI के चैयरमैन नीलकांत मिश्रा की अध्यक्षता में समिति बनाई गई. इस समिति में AI के सह- संस्थापक विवेक राघवन, न्यूटनिक्स के संस्थापक धीरज पांडेय, अमृता यूनिवर्सिटी के डॉ. P. पूर्णचंद्रन, मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अनिल जैन व IIT जोधपुर के मयंक वत्स शामिल थे.
चेहरे से पहचान की तैयारी
वर्तमान में हर रोज करीब 9 करोड़ आधार ऑथेंटिकेशन होते है. इनमें से लगभग 9 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए होते है. अब सरकार का उद्देश्य लगभग 100 करोड़ आधार ऑथेंटिकेशन फेस रिकग्निशन से करने का है. AI के इस्तेमाल से फेस रिकग्निशन सिस्टम समय-समय पर अपडेट होता रहेगा, जिससे बार- बार बायोमेट्रिक देने की आवश्यकता नहीं होगी.
इस नई व्यवस्था से पहले सरकार करीब 18 करोड़ बच्चों के बायोमैट्रिक अपडेट करने की तैयारी में है. UIDAI के साथ सरकार का मौजूदा अनुबंध 2027 में पूरा होगा, उसके बाद 2032 तक नया अनुबंध शुरू होगा.