रिहायशी कॉलोनियों में घर के आसपास मिलेगी स्वास्थ्य सेवाएं, हरियाणा सरकार ने दी नर्सिंग होम खोलने की अनुमति

चंडीगढ़ | हरियाणा की नायब सैनी सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं का बुनियादी ढांचा मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने अब लाइसेंस प्राप्त रिहायशी कॉलोनियों में नर्सिंग होम खोलने को लेकर बहुप्रतीक्षित नीति जारी कर दी है. टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने बताया कि इस नीति से लोगों को अपने ही मोहल्ले में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलना आसान हो जाएगा. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की मांग पर यह फैसला लिया गया है.

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टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और अस्पतालों की दूरी के चलते लोगों को एमरजेंसी जैसी स्थिति में खासी परेशानी झेलनी पड़ती थी लेकिन अब रिहायशी क्षेत्रों में नियंत्रित और नियमानुसार नर्सिंग होम की अनुमति देने से लोगों को अपने घर के आसपास ही स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सकेगा.

नई नीति की अधिसूचना जारी

विभाग द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, नई नीति के तहत केवल वे योग्य डॉक्टर (एलोपैथिक /आयुष) नर्सिंग होम खोल सकेंगे, जिनके पास मेडिकल काउंसिल/आयुष काउंसिल का वैध रजिस्ट्रेशन होगा और जो वर्तमान में प्रैक्टिस कर रहे हों. ऐसे डॉक्टरों का IMA की स्थानीय शाखा में रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है.

डॉक्टर का संबंधित आवासीय प्लॉट पर मालिकाना हक होना चाहिए. निर्धारित कन्वर्जन शुल्क के साथ शपथपत्र भी देना होगा. यह नीति पूरे राज्य की लाइसेंस प्राप्त रिहायशी कॉलोनियों पर लागू होगी. यह नीति पूरे राज्य की लाइसेंस प्राप्त रिहायशी कॉलोनियों पर लागू होगी.

यह रहेगी शर्तें

  • प्रदेश सरकार ने इस नीति के तहत क्षेत्र के पोटेंशियल के आधार पर न्यूनतम प्लॉट साइज तय किया है. हाइपर और हाई पोटेंशियल जोन में साढ़े 300 वर्ग गज से कम साइज में मंजूरी नहीं मिलेगी. इसी तरह मीडियम और लो पोटेंशियल जोन में 250 वर्ग गज साइज से कम के प्लाट में अनुमति नहीं होगी.
  • नर्सिंग होम केवल सर्विस रोड या सेक्टर/मास्टर रोड से लगते प्लॉट पर ही अनुमति प्राप्त करेंगे. एक सेक्टर में अधिकतम 4 साइट की अनुमति होगी. केवल उन्हीं कॉलोनियों में अनुमति दी जाएगी जहां सभी आंतरिक सेवाएं बिछ चुकी हों और पूर्ण/ आंशिक कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी हो चुका हो.
  • राज्य सरकार ने जोन के हिसाब से प्रति वर्ग गज शुल्क तय किया है. हाइपर जोन में 10 हजार रुपये और हाई पोटेंशियल जोन में 8 हजार रुपये प्रति वर्ग गज फीस जमा करानी होगी. मीडियम जोन वाले शहरों में 6 हजार रुपये और लो पोटेंशियल जोन वाले शहरों में 4 हजार रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से भुगतान करना होगा. महत्वपूर्ण बात यह है कि इन मामलों में आंतरिय बाह्य शुल्क सहित कोई अन्य अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा.
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Ajay Sehrawat
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मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ.