नई दिल्ली | वर्तमान में गर्मी अपनी चरम सीमा पर है, लेकिन अभी जनजीवन को राहत नहीं है. आगे तापमान में ओर उछाल और लू की लहरें तेज होती दिखाई देगी, क्योंकि 25 जून से नौतपा शुरू होने वाला है. नौतपा को हिंदू मान्यताओं में साल के सबसे गर्म 9 दिनों का दौर माना जाता है. यह समय आमतौर पर मई के अंतिम दिनों या फिर जून की शुरुआत में आता है. ‘नौतपा’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘नौ’ मतलब 9 और ‘तपा’ का मतलब भीषण गर्मी एवं तपन.

ऐसे तय होते है नौतपा के 9 दिन
ऐसा माना जाता है कि जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब नौतपा शुरू होता है. इसी के आधार पर नौतपा के 9 दिन गिने जाते है. ज्योतिष गणना के अनुसार, सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के बाद शुरुआती 9 दिनों को नौतपा कहा जाता है. इस अवधि में गर्मी अपना प्रचंड रूप धारण कर लेती है.
ऐसा माना जाता है कि जब सूरज रोहिणी में प्रवेश करता है, तब इस मेल-जोल के कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ने लगता है और सूर्य की तपिश सबसे ज्यादा हो जाती है. रोहिणी को पारंपरिक रूप से शीतलता और उर्वरता से जोड़ा जाता है, लेकिन सूरज अग्नि और ऊष्मा का प्रतीक है इसीलिए गर्मी बढ़ती है और भयंकर लू की स्थिति उत्पन्न होता है.
नौतपा के पीछे वैज्ञानिक कारण
वैज्ञानिक दृष्टि से नौतपा का संबंध पृथ्वी की स्थिति और सूर्य की सीधी किरणों से जोड़ा जाता है. मई के अंत और जून की शुरुआत की अवधि के दौरान सूरज की किरणे उत्तरी गोलार्ध के बड़े हिस्सों पर सीधा प्रभाव डालती है, जिससे नमी कम होती है और गर्म तेज हवाएं चलती है. दिन के तापमान में ज्यादा बढ़ोतरी इसकी पहली निशानी है. इस दौरान तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से 50 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है. नौतपा के दौरान सूरज डूबने के बाद भी वातावरण गर्म रहता है, इसीलिए नौतपा को भीषण गर्मी का संकेत माना जाता है.