नई दिल्ली | रेलवे बोर्ड ने रेल कर्मचारियों के लिए अवकाश नियमों में बड़ा बदलाव किया है. बोर्ड ने चाइल्ड केयर लीव (CCL) और ड्यूटी के दौरान लगी चोट या कार्य से जुड़ी बीमारी पर मिलने वाले अवकाश के प्रावधानों को अधिक स्पष्ट और कर्मचारी हितैषी बनाया है. इसके लिए भारतीय रेलवे स्थापना संहिता (IREC) के अध्याय- 5 में संशोधन लागू करने के आदेश जारी किए गए हैं. नए नियमों के तहत महिला रेल कर्मचारियों को पूरी सेवा अवधि के दौरान अधिकतम 730 दिन यानी दो वर्ष तक चाइल्ड केयर लीव लेने की सुविधा मिलेगी.

यह अवकाश एक साथ लेने की बाध्यता नहीं होगी. जी हां, अब कर्मचारी जरूरत के अनुसार अलग- अलग चरणों में इसे से सकते हैं. बच्चों की पढ़ाई, परीक्षा, बीमारी या देखभाल से जुड़ी अन्य आवश्यकताओं के लिए इसका लाभ मिलेगा. रेलवे बोर्ड ने इन प्रावधानों को केंद्र सरकार के संशोधित CCS Rules के अनुरूप लागू किया है.
नियमों में बदलाव
रेलवे ने वर्क रिलेटेड इलनेस एंड इंजरी लीव (WRIL) के नियमों में भी अहम बदलाव किया है. अब ड्यूटी के दौरान चोट लगने या कार्य से संबंधित बीमारी की स्थिति में पहले लागू स्पेशल डिसएबिलिटी लीव (SDL) और हॉस्पिटल लीव की जगह एकीकृत व्यवस्था लागू होगी. नए प्रावधानों के अनुसार यदि कोई कर्मचारी ड्यूटी के दौरान घायल होकर अस्पताल में भर्ती होता है, तो भर्ती रहने की पूरी अवधि में उसे पूरा वेतन और सभी भत्ते मिलेंगे.
कर्मचारियों को लाभ
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सामान्य रेल कर्मचारियों को छह महीने तक पूर्ण वेतन के साथ अवकाश मिलेगा. इसके बाद, आवश्यकता होने पर 12 महीने तक आधे वेतन पर छुट्टी दी जा सकेगी. वहीं, रेलवे सुरक्षा बल (RPF/ RPSF) के अधिकारियों और जवानों के लिए उनकी सेवा की प्रकृति को देखते हुए अधिक उदार प्रावधान किए गए हैं. नए नियमों से विशेष रूप से महिला कर्मचारियों और ड्यूटी के दौरान जोखिम भरे कार्य करने वाले रेल कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है.