चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार के ग्रुप सी और डी पदों के लिए होने वाले CET की पॉलिसी के लिए हाईकोर्ट में चुनौती पेश की गयी है. याचिकाकर्ताओं की तरफ से आग्रह किया गया है कि तकनीकी पदों विशेष तौर पर जूनियर कोच या अन्य के लिए अलग सीईटी हो. ऐसा इसलिए क्योंकि अपने- अपने फील्ड में निपुण ये अभ्यर्थी सीईटी पास नहीं कर पाते क्योंकि सीईटी में उनके फील्ड से संबंधित सवाल नहीं आते.
21 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ द्वारा इस याचिका पर सुनवाई की गयी. सरकार की ओर से पेश एडवोकेट का कहना है कि वे उन्हें इस मामले में अदालत की सहायता करने के लिए थोड़ा वक़्त चाहिए. मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त,2025 को होगी. यह याचिका खिलाड़ियों संजय कुमार, अमित कुमार, प्रवीन नैन, रवि कुमार, दीक्षा, समीक्षा खवं और मंजू की तरफ से दायर करवाई गयी है.
अभ्यर्थी रह जाते हैं मुख्य परीक्षा से वंचित
याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट अंकुर सिधार ने खंडपीठ के सामने दलील पेश की कि ग्रुप सी के लिए सीईटी भले ही 10 जमा 2 के स्तर का हो पर सीईटी में जो सवाल पूछे गए है, उनमें जूनियर कोच (खिलाड़ियों) या अन्य तकनीकी पदों से संबंधित प्रश्न ही नहीं थे. ऐसे में ये अभ्यर्थी सीईटी पास नहीं है. यदि पास कर पाते हैं, तो मुख्य परीक्षा देने से वंचित रह जाते हैं.
रद्द की जाए जारी सीईटी पॉलिसी
एडवोकेट अंकुर सिधार ने यह भी दलील दी कि पिछले सीईटी में कुछ तकनीकी पद ऐसे हैं, जिनके लिए न्यूनतम चार गुना भी योग्य उम्मीदवार इसलिए नहीं मिल पाए थे क्योंकि वे सीईटी पास नहीं कर पाए थे. उनका आग्रह है कि 31 दिसंबर 2024 को जारी सीईटी पॉलिसी को रद्द किया जाए. इन तकनीकी पदों के लिए अलग से सीईटी लिया जाए और पास होने के लिए जनरल कैटेगरी के लिए 40 फीसदी, आरक्षित श्रेणी के लिए 30 फीसदी अंक निर्धारित होने चाहिए.
