चंडीगढ़ | हरियाणा में E- टेंडरिंग को लेकर मचे बवाल की गूंज नई दिल्ली तक सुनाई दे रही है. एक तरफ जहां सरपंच एसोसिएशन ने BJP-JJP गठबंधन सरकार के विधायकों के घरों के बाहर डेरा डाला हुआ है तो वहीं दूसरी ओर सूबे के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार E टेंडरिंग के अपने फैसले पर एक कदम भी पीछे नहीं हटेगी. सरकार का दावा है कि E टेंडरिंग से पंचायतों में होने वाले भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा तो वहीं पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भी खट्टर सरकार के इस फैसले पर मुहर लगाई है.
वहीं, अब इस मामले को लेकर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने राज्यसभा में नोटिस दिया है. इस नोटिस के जरिए उन्होंने ने सरपंचों के अधिकारों में की गई कटौती को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है. सरकार की इस नई प्रणाली के खिलाफ राज्यसभा में बोलते हुए दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि 73वें संविधान संशोधन के जरिए भारत के संविधान ने देश की पंचायतों को विकास करने का अधिकार दिया है.
हुड्डा ने कहा कि समय- समय पर सरकारों ने इस व्यवस्था को मजबूत बनाया है लेकिन खट्टर सरकार चुनें हुए पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों में कटौती करने के उद्देश्य से E टेंडरिंग प्रणाली लेकर आई है. उन्होंने कहा कि पंचायती राज में चुनाव होते हैं और जनता अपने मत का प्रयोग कर सरपंच व ग्राम पंचायत का चुनाव करती है.
दीपेंद्र ने कहा कि सरपंचों को विकास कार्यों के लिए मात्र 2 लाख रुपए की पावर दी गई है जो सरासर ग़लत फैसला है. इस प्रणाली से गांव में विकास कार्य प्रभावित होंगे और लोकतांत्रिक व्यवस्था ठप्प हो जाएगी. सरकार E टेंडरिंग प्रणाली लागू कर जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के अधिकारों का न केवल हनन कर रही है बल्कि उन्हें अफसरशाही के अधीन करना चाहती है.
उन्होंने कहा कि सरकार की E टेंडरिंग प्रणाली के खिलाफ आज पूरे हरियाणा से सरपंच सड़कों पर हैं और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने पंचायती राज मंत्री से इस अति महत्वपूर्ण विषय का संज्ञान लेकर जनता द्वारा चुने गये सरपंचों के अधिकार और उनके मान- सम्मान की रक्षा करने की अपील की है.
