चंडीगढ़ | पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की तरफ से सरकारी सेवाओं में अनुशासन को सबसे अहम बताते हुए हरियाणा रोडवेज के एक कर्मचारी की बर्खास्तगी को पूर्ण रूप से वैध माना है. कोर्ट द्वारा कहा गया कि बार- बार बिना अनुमति अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारी को राहत नहीं मिल सकती, विशेषतौर पर जब विभागीय कार्यवाही विधिसम्मत तरीके से की गई हो. कोर्ट ने अपीलीय अदालत द्वारा कर्मचारी के पक्ष में दिए गए निर्णय को पलट दिया व राज्य सरकार की अपील को स्वीकार कर लिया.

अनुकंपा आधार पर मिली थी नौकरी
जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की तरफ से हरियाणा सरकार द्वारा दायर नियमित द्वितीय अपील पर यह निर्णय दिया गया है जिसमें हिसार की अपीलीय अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी. मामले के मुताबिक कर्मचारी हरनूप सिंह को उनके पिता की मौत के बाद हरियाणा रोडवेज में अनुकंपा आधार पर हेल्पर की नौकरी मिली थी. वर्ष 1997 में उनका ट्रांसफर करनाल डिपो में हुआ. रिकार्ड से साफ हुआ कि कर्मचारी कई बार लंबे वक्त तक बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहा.
विभाग की तरफ से उसे बार- बार चार्जशीट जारी की गई, जांच कराई और “लीव विदाउट पे” तथा वेतन वृद्धि रोकने जैसी दंडात्मक कार्रवाई भी की गई.
अपीलीय अदालत ने कर्मचारी को दी थी राहत
उसका व्यवहार नहीं सुधरा. अदालत ने देखा कि हर बार कर्मचारी को नोटिस दिया गया, जांच अधिकारी नियुक्त किया गया और व्यक्तिगत सुनवाई का मौका भी दिया गया है. कर्मचारी न तो संतोषजनक जवाब दे सका और न ही अपनी गैरहाजिरी के समर्थन में कोई ठोस चिकित्सा प्रमाण पेश कर पाया. यह भी सामने आया कि कर्मचारी ने जांच प्रक्रिया में हिस्सा लिया.
मगर उसने न तो गवाहों से बहस की और नही कोई सबूत पेश किया. अपीलीय अदालत ने कर्मचारी को राहत देते हुए बर्खास्तगी को अवैध करार दिया था. मगर हाई कोर्ट ने इसे कानून की गलत व्याख्या कहा.