चंडीगढ़ | हरियाणा में बुढ़ापा पेंशन का लाभ उठा रहे बुजुर्ग एक अजीबोगरीब कशमकश में फंसे हुए हैं. सूबे की नायब सैनी सरकार ने जब से बुढ़ापा पेंशन के लिए न्यूनतम आय सीमा तय की है, तब से हजारों किसानों को बुढ़ापा पेंशन कटने का डर सता रहा है. प्रदेश सरकार ने बुढ़ापा पेंशन के लिए न्यूनतम 3 लाख रुपये सालाना आय तय की है. यदि किसी की आय 3 लाख से ज्यादा हो जाती है तो उसकी बुढ़ापा पेंशन कट सकती है.
वह बीपीएल परिवारों को मिलने वाली अन्य सुविधाओं से भी वंचित रह सकते हैं. अब बुजुर्ग किसान भी मेरी फसल- मेरा ब्योरा पोर्टल पर अपनी फसल का पंजीकरण करवाने से कतरा रहे हैं. ऐसे में वह गेहूं और सरसों की फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर नहीं बेच पाएंगें और उन्हें निजी व्यापारियों को औने- पौने दामों पर फसल बेचने पर मजबूर होना पड़ेगा.
कशमकश में फंसे किसान
किसानों का कहना है कि वे न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 3 लाख रुपये से अधिक की फसल बेचेंगे तो उनका नाम बीपीएल श्रेणी से हट सकता है, जिससे राशन कार्ड और बुढ़ापा पेंशन जैसी सुविधाएं बंद हो सकती हैं. पिछले कई महीनों में प्रदेश के कई बुजुर्गो की पेंशन अचानक रुक गई है. जब उन्होंने समाज कल्याण विभाग से जानकारी ली तो बताया कि उन्होंने फसल ज्यादा मूल्य की बेची है और उनकी वार्षिक आय निर्धारित सीमा से ऊपर हो गई. किसानों का कहना है कि इस स्थिति ने उन्हें असमंजस डाल दिया है. अब वे तय नहीं कर पा रहे कि अपनी मेहनत की फसल बेचें या सरकारी लाभ बचाएं.
J फॉर्म भरते ही आएंगे पैसे
किसान को फसल बेचने के लिए मेरी फसल- मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण करवाना होता है. मंडी में मार्किट कमेटी द्वारा बॉयोमीट्रिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद किसान का टोकन काटा जाता है. इसके बाद ही किसान आढ़ती के माध्यम से खरीद एजेंसियों को अपनी फसल बेचता है. फसल बिकते ही आढ़ती मार्केट कमेटी से उसका ऑनलाइन J फार्म कटवाता है. जैसे ही किसान का J फार्म कटता हैं, फसल बिक्री की पेमेंट किसान के खाते में जमा हो जाती है.
