चंडीगढ़ | हरियाणा विद्यालय शिक्षा निदेशालय (HBSE) ने प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में हरियाणा राज्य- गीत के नियमित गायन को अनिवार्य करने के आदेश जारी किए हैं. 22 जुलाई 2026 को जारी निर्देशों के अनुसार अब प्रत्येक सरकारी विद्यालय में सप्ताह में एक दिन प्रार्थना सभा के बाद राज्य- गीत का सामूहिक गायन कराया जाएगा. विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को निर्देश दिए हैं कि इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू कराया जाए.

सभी स्कूलों में आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित की जाएं. विभाग का उद्देश्य विद्यार्थियों में हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत, गौरव और राज्य के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करना है. 19 दिसंबर 2023 को विधानसभा में प्रारूप पर विस्तृत चर्चा हुई और चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पांच विधायकों की समिति का गठन किया गया था.
सम्मान की भावना
नियमित रूप से राज्य- गीत गाने से विद्यार्थियों का प्रदेश की संस्कृति, इतिहास और पहचान से जुड़ाव बढ़ेगा. साथ ही, उनमें राज्य के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान की भावना भी विकसित होगी. विभाग ने इस पहल को विद्यार्थियों में सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम बताया है. यह आदेश विद्यालय शिक्षा निदेशालय के सहायक निदेशक (शैक्षिक शाखा) की ओर से जारी किया गया है. इसकी प्रतियां शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव, महानिदेशक माध्यमिक शिक्षा और अन्य संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई हैं, ताकि निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन किया जा सके.
प्रक्रिया लंबी रही
हरियाणा राज्य- गीत के रचनाकार पानीपत के डॉ. बालकिशन शर्मा हैं. गीत को स्वर डॉ. श्याम शर्मा ने दिया है, जबकि इसका संगीत पारस चोपड़ा ने तैयार किया है. इसके निर्देशन की जिम्मेदारी रोहतक की मालविका पंडित ने निभाई. खास बात यह रही कि राज्य- गीत के निर्माण में जुड़े किसी भी कलाकार ने सरकार से कोई पारिश्रमिक नहीं लिया. राज्य- गीत के चयन की प्रक्रिया भी लंबी रही. चयन समिति ने 12 बैठकों के बाद गीत को अंतिम रूप दिया. 15 सितंबर 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर राज्य- गीत चयन का प्रस्ताव लेकर आए थे.