चंडीगढ़ | पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पेंशन अधिकारों से जुड़े 69 साल पुराने सेवा विवाद में अहम फैसला सुनाया है. जिला बोर्ड के अधीन दी गई सेवा को केवल इस आधार पर पेंशन लाभ से बाहर नहीं किया जा सकता कि उस अवधि में कर्मचारी ने कान्ट्रिब्यूटरी प्रोविडेंट फंड (सीपीएफ) में अंशदान नहीं किया था. हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार की दूसरी अपील खारिज करते हुए अधीनस्थ दोनों अदालतों के फैसलों को बरकरार रखा. पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की गणना करते समय एडहाक सेवा को भी शामिल किया जाता है.

जस्टिस हरकेश मनुजा की पीठ ने कहा कि संबंधित नियमों में कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि सीपीएफ की सदस्यता न होने पर पूर्व सेवा को पेंशन के लिए अमान्य माना जाए. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पेंशन संबंधी लाभ तय करते समय एडहाक सेवा को भी गणना में शामिल किया जाता है.
पंजाब सरकार में विलय
मामला लुधियाना निवासी हरदयाल सिंह से जुड़ा है. उन्होंने 31 अगस्त 1953 से 30 सितंबर 1957 तक जिला बोर्ड के स्कूलों में सेवा दी थी. 1 अक्टूबर 1957 को इन स्कूलों का पंजाब सरकार में विलय हो गया, जिसके बाद वह सरकारी कर्मचारी बन गए. 30 जून 1986 को सरकारी हाई स्कूल, धर्मपुरा से हेडमास्टर पद से सेवानिवृत्त होने पर उनके सेवानिवृत्ति लाभ निर्धारित करते समय जिला बोर्ड के अधीन दी गई सेवा अवधि को नहीं जोड़ा गया.
सेवा पेंशन योग्य नहीं
इस वजह से उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण, जनरल प्रोविडेंट फंड, हेडमास्टर ग्रेड के लाभ और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों का पूरा भुगतान नहीं मिल पाया. इसके खिलाफ हरदयाल सिंह ने अदालत का दरवाजा खटखटाया. ट्रायल कोर्ट ने एक अगस्त 1995 को उनके पक्ष में फैसला सुनाया, जिसे बाद में प्रथम अपीलीय अदालत ने भी बरकरार रखा. पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट में दूसरी अपील दायर करते हुए दलील दी कि संबंधित अवधि की सेवा पेंशन योग्य नहीं थी, क्योंकि कर्मचारी ने उस दौरान कान्ट्रिब्यूटरी प्रोविडेंट फंड में अंशदान नहीं किया था.
दलील भी खारिज
सरकार ने पंजाब एजुकेशनल सर्विस क्लास- तीन रूल्स, 1961 के नियम 13(2) का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी सेवा का लाभ पेंशन में नहीं दिया जा सकता. हाई कोर्ट ने सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया. अदालत ने कहा कि नियम 13(2) में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिससे केवल सीपीएफ सदस्यता न होने के आधार पर पूर्व सेवा को पेंशन लाभ से बाहर किया जा सके. कोर्ट ने सरकार की यह दलील भी खारिज कर दी कि संबंधित कर्मचारी की पूर्व सेवा एडहाक थी.