800 साल पुराना हरियाणा का यह गांव, बन गया पर्यटकों की पहली पसंद

झज्जर | हरियाणा के झज्जर जिले का तलाव गांव आज अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, पारंपरिक जीवनशैली और टिकाऊ विकास मॉडल की वजह से खास पहचान बना चुका है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लगभग 50 किलोमीटर और झज्जर शहर से करीब 3- 4 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव शहर की भागदौड़ से दूर शांति और ग्रामीण संस्कृति का अनूठा अनुभव कराता है. करीब 5,000 से 6,000 की आबादी वाले इस गांव में हर साल लगभग 1 लाख पर्यटक पहुंचते हैं. तलाव गांव की सबसे बड़ी खासियत इसकी पारंपरिक कृषि पद्धतियां, सुंदर उद्यान, जैविक खेती, टिकाऊ खाद बनाने के तरीके और वर्षा जल संचयन जैसी गतिविधियां हैं.

Village Pond Talab Gaon Travel

गांव में एकल उपयोग वाले प्लास्टिक को बढ़ावा नहीं दिया जाता और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है. यही कारण है कि यह गांव ग्रामीण पर्यटन का बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरा है.

तलाव गांव

ग्राम प्रधान अनिल कुमार के अनुसार, गांव ने हाल ही में आयोजित जी-20 भ्रष्टाचार रोधी समूह की बैठक में आए प्रतिनिधियों की भी मेजबानी की थी. इससे गांव की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत हुई. गांव के आसपास भिंडावास वन्यजीव अभयारण्य, सुल्तानपुर पक्षी अभयारण्य, प्रतापगढ़ फार्म और जैव विविधता वाले कई प्रमुख स्थल मौजूद हैं, जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं.

तलाव गांव को केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने देश के 35 ‘सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव’ में शामिल किया था. विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित समारोह में गांव को कांस्य श्रेणी का पुरस्कार भी मिला. यह सम्मान गांव की पर्यटन क्षमता और टिकाऊ विकास की दिशा में किए गए प्रयासों का प्रमाण माना जाता है.

इतिहास

करीब 800 वर्ष पुराने इस गांव का इतिहास भी बेहद रोचक है. बताया जाता है कि गांव बसने से पहले यहां एक विशाल तालाब हुआ करता था. सबसे पहले दिल्ली से आए चार भाई इस तालाब के किनारे पहुंचे थे, जिनमें से एक यहीं बस गया जबकि बाकी अन्य स्थानों पर चले गए. बाद में फुसला गोत्र के लोग भी यहां आकर बस गए. इसी बड़े तालाब के कारण गांव का नाम ‘तलाव’ पड़ा.

इतिहास के अनुसार, बाद में गहलावत गोत्र के लोग भी यहां आकर बस गए और समय के साथ गांव का विस्तार होता गया. विभाजन और दंगों के दौरान यहां रहने वाले मुस्लिम समुदाय के कई परिवार अन्य स्थानों पर चले गए, जबकि कुछ परिवार गांव में ही रह गए.

बनाया पहचान

तलाव गांव को वीरों का गांव भी कहा जाता है. प्रथम विश्व युद्ध (1914- 1919) में इस गांव के 56 लोगों ने हिस्सा लिया था, जिनमें से 6 सैनिक शहीद हुए थे. उनकी याद में लगा स्मृति-पत्र आज भी गांव की पुरानी चौपाल में मौजूद है. गांव में 5 आंगनबाड़ी केंद्र, एक स्कूल, खेल स्टेडियम, श्याम मंदिर और नौगजा पीर जैसे प्रमुख स्थल भी हैं. प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध इतिहास और पर्यावरण संरक्षण की सोच के कारण तलाव गांव आज हरियाणा के प्रमुख ग्रामीण पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना चुका है.

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Sanjukta Pandit
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मेरा नाम संयुक्ता पंडित है. मै हरियाणा ई खबर में बतौर कंटेंट एडिटर के पोस्ट पर लगभग 4 सालों से काम रही हूँ. मेरी हमेशा कोशिश रहती है आप लोगो तक ब्रेकिंग न्यूज़ जल्द से जल्द अपडेट करूं और न्यूज़ में कोई व्याकरण की गलती न हो.