तीनों कृषि कानून वापस नहीं होंगे, नए सुझावों का स्वागत, हरियाणा पहुंचे भाजपा सांसद राजकुमार चाहर की दो टूक

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चंडीगढ़ । भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर ने राकेश टिकैत और गुरनाम सिंह चढूनी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वे कांग्रेस की भाषा बोल रहे हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस नेताओं के हाथों की कठपुतली बने हुए हैं. चाहर ने कहा कि 3 कृषि कानूनों के विरोध मे 7 महीने से चल रहे आंदोलन का कोई औचित्य नहीं है, बल्कि यह राजनीति से प्रेरित है. उन्होंने कहा कि यदि किसान जित्थेबंदिया सोचती है तीन कृषि कानून वापस होंगे तो यह उनकी भूल है. लेकिन यदि वे किसानों के कल्याण के लिए किसी तरह का नया सुझाव देना चाहते हैं तो उनका बातचीत के लिए स्वागत है.

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कांग्रेस नहीं चाहती किसान उनके चुगल से बाहर निकले

वहीं भाजपा सांसद राजकुमार चाहर गत दिवस हरियाणा के दौरे पर थे. किसान मोर्चा के प्रांतीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक सुखविंदर सिंह मांडी ने राजकुमार चाहर का राज्य में स्वागत किया. दिल्ली से चंडीगढ़ के रास्ते में चाहर का किसान मोर्चा के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने कई स्थानों पर स्वागत किया. करनाल में उन्होंने किसानों को संबोधित भी किया. बता दें कि चंडीगढ़ में जीत के दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस कभी नहीं चाहती थी कि किसान उसके चंगुल से बाहर निकले. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने देश में इतने साल राज किया, लेकिन आज तक किसानों की माली हालत में सुधार के लिए कोई भी कार्य नहीं किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को खुशहाली आर्थिक आजादी और गांवों को उन्नति देनी चाहिए तो कांग्रेस को अपना जनाधार खिसकने की चिंता हो गई. लिहाजा उसने किसानों के नाम पर कुछ जत्थे बंदियों को खड़ा कर आंदोलन चालू करवा दिया.

नए कृषि कानूनों से किसानों की आय व जीवन में बदलाव – चाहर

राजकुमार चाहर ने कहा केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानून किसानों के जीवन में बदलाव लाने के साथ ही उनकी आय में बढ़ोतरी करने वाले हैं. यह आंदोलन पंजाब से चालू हुआ. जिस तरह कुछ लोगों ने कश्मीर में धारा 370 हटाने का विरोध किया उसी तरह किसानों को गुलामी की जंजीरों से बाहर निकालने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों का विरोध हो रहा है. कांग्रेस चाहती है कि पुराना सिस्टम चलता रहे. चाहर का कहना है कि प्रधानमंत्री बार-बार क़ह रहे हैं कि किसानों के उत्थान को लेकर हमारी नियत गंगा की तरह पवित्र है. इसके बावजूद आंदोलन का कोई औचित्य नजर नहीं आता.

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