हांसी | हरियाणा केवल कृषि और खेलों के लिए नही, बल्कि अपनी समृद्ध ऐतिहासिक धरोहरों के लिए भी प्रसिद्ध है. राज्य में कई प्राचीन किले मौजूद है, जिनका इतिहास सदियों पुराना है. इन्हीं में से एक है हांसी जिले में स्थित असीगढ़ का किला, जिसे प्राचीन समय में ‘हिन्दुस्तान की दहलीज’ कहा जाता था. इस किले को बड़सी गेट के नाम से भी जाना जाता है.
बताया जाता है कि इस किले का संबंध महान शासक पृथ्वीराज चौहान से रहा है. 12वीं शताब्दी में उन्होंने इस किले को मजबूत करवाया और इसे सैन्य दृष्टि से ओर अधिक शक्तिशाली बनाया. उस समय हांसी क्षेत्र तलवार बनाने और युद्धकला के लिए भी प्रसिद्ध था.
बड़सी गेट के नाम से मशहूर
इतिहासकारों के अनुसार, यह किला रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण था. उस दौर में जो भी शासक इस किले पर कब्जा कर लेता था, उसके लिए दिल्ली और पूरे हिंदुस्तान पर शासन करना आसान माना जाता था. इसी कारण इसे हिंदुस्तान का प्रवेश द्वार या ‘दहलीज’ कहा जाता था. बड़सी गेट के नाम से मशहूर यह किला शहर के बीचोंबीच स्थित है और शहर के लोग इसके नीचे से गुजरते है.
खुदाई के दौरान मिली कई चीजें
साल 2004 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने किले के इतिहास को जानने के लिए यहां गहरी खुदाई करवाई और यह खुदाई लंबे समय तक चली. इसमें बुद्ध, कुषाण, गुप्त, यौद्धेध्य, राजपूत, सल्तनत, मुगल और अंग्रेजी दौर के सिक्के, ईंटे, मूर्तियां, मिट्टी के बर्तन और पुराने मकानों के अवशेष सामने आए. इन खोजों से यह साबित हुआ कि हांसी शहर सदियों से समृद्ध इतिहास और सभ्यता का केंद्र रहा है.
इससे पहले भी किले में खुदाई के दौरान कई महत्वपूर्ण चीजें सामने आई है. साल 1982 में भी यहां खुदाई करते समय जैन धर्म से जुड़ी कुछ प्राचीन मूर्तियां मिली थी. इन खोजों से इतिहासकारों को यह समझने में आसानी हुई कि इस क्षेत्र में अलग- अलग संस्कृतियों और धर्मों का प्रभाव लंबे समय तक रहा है.
ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक
हांसी का यह किला आज भी हरियाणा की ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक बना हुआ है. इसकी प्राचीन दीवारें और संरचनाएं उस दौर की याद दिलाती है जब यह किला पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और सत्ता का महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था. इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के लिए यह स्थान आज भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
