हिसार | हरियाणा के हिसार के पटेल नगर में रहने वाला अरोड़ा परिवार ना तो बोल सकता है, ना ही सुन सकता है, फिर भी जिंदगी की हर परेशानियों को उन्होंने हिम्मत से दूर किया है. इस परिवार में विजय अरोड़ा, उनकी पत्नी कुसुम और दो बच्चे जानवी व सरल हैं. चारों ही बोलने और सुनने में असमर्थ हैं, फिर भी वे इशारों की भाषा में आपस में आसानी से संवाद करते हैं. परिवार पूरी तरह से खुशहाल जीवन जी रहा है.
विजय टेलरिंग का काम करते हैं, जबकि उनकी पत्नी कुसुम हाउसवाइफ हैं. आपस में संवाद करने के लिए वे टेक्नोलॉजी का सहारा लेकर वीडियो कॉलिंग के जरिए इशारों से बात करते हैं.
बेटी को मिल चुका राष्ट्रपति पुरस्कार
परिवार की बेटी जानवी को ‘श्रेष्ठ दिव्यांग बालिका’ के रूप में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मानित किया जा चुका है. जानवी ने चित्रकला और शतरंज में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है और कई मेडल व अवार्ड हासिल किए हैं. बेटा सरल भी काफी प्रतिभाशाली है. दोनों बच्चों को पेंटिंग और शतरंज का शौक है और वे अपना यूट्यूब चैनल भी चलाते हैं. जानवी का सपना है कि वह बड़ी होकर मूकबधिर लोगों के लिए टीवी एंकर बने और सरल रेसिंग में करियर बनाना चाहता है.
दादा को पोती जानवी पर गर्व
जानवी के दादा राजकुमार अरोड़ा रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी हैं. उन्होंने बताया कि उनके चार बच्चों में से विजय अकेले मूकबधिर हैं. विजय ने पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की और फिर टेलरिंग का काम शुरू कर दिया. विजय का विवाह एक मूकबधिर लड़की कुसुम से हुआ, ताकि दोनों एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझ सकें. कुछ समय बाद जन्मे उनके दोनों बच्चे भी जन्म से मूकबधिर हैं, लेकिन परिवार को इस बात का कोई मलाल नहीं है. दादा राजकुमार बताते हैं कि वह अपनी पोती जानवी की वजह से तीन बार राष्ट्रपति भवन जा चुके हैं और उन्हें उस पर गर्व है.
पड़ोसी भी करते हैं सराहना
इस परिवार पर पड़ोसियों को भी काफी गर्व है. पड़ोसी गौरव भीम ने बताया कि अरोड़ा परिवार बहुत नेक है. वे विजय से अपने कपड़े सिलवाते हैं और विजय इतनी सहजता से इशारों में बातचीत कर लेते हैं कि आस- पास के लोग भी अब उनकी भाषा समझने लगे हैं. कुसुम साइन लैंग्वेज के जरिए बच्चों को पढ़ाती हैं. यह परिवार हमेशा खुश रहता है और समाज के लिए एक प्रेरणा बन चुका है.
