कैथल । कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए हरियाणा सरकार ने 3 जनवरी से 15 से 18 आयु वर्ग के किशोरों को कोरोना वैक्सीन लगाने का अभियान शुरू किया था लेकिन वैक्सीन लगवाने को लेकर खुद किशोर और उनके अभिभावकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है. इतना ही नहीं काफी अभिभावकों में तरह-तरह की भ्रांतियां फैली हुई है जिसके बाद वो अपने बच्चों को वैक्सीन लगवाने के पक्ष में नहीं है. जिन किशोरों को वैक्सीन लग चुकी है, उनके अभिभावकों को यह चिंता सता रही है कि इसका असर कैसा रहेगा.
जिला स्वास्थ्य विभाग के प्रत्येक कर्मचारी को 100 पात्र किशोरों को वैक्सीन लगाने का टारगेट दिया गया है और जब इसको लेकर किशोरों व उनके अभिभावकों से मुलाकात की गई तो कई चौकाने वाली बात सामने आई. इस दौरान सरकारी स्कूलों के 340 व प्राइवेट स्कूलों के 1487 बच्चों ने वैक्सीन लगवाने से साफ इनकार कर दिया. इससे यह स्पष्ट हो गया है कि जिला में 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के कुल 80 हजार 752 किशोरों को वैक्सीन लगाने का टारगेट अभी हासिल नहीं हो पाएगा.
हालांकि वैक्सीन लगवाना स्वैच्छिक है लेकिन ज्यादा से ज्यादा किशोरों को वैक्सीनेशन अभियान के तहत कवर कर कोरोना महामारी के खिलाफ सुरक्षा कवच मुहैया करवा सकें. इसके लिए जिला प्रशासन ऐसे किशोरों और अभिभावकों की काउंसलिंग करने पर विचार कर रहा है ताकि उन्हें वैक्सीन की उपयोगिता समझाई जा सकें.
प्राइवेट स्कूलों के विद्यार्थी कम लगवा रहे हैं वैक्सीन
जिलें में अब तक 15-18 आयु वर्ग में सरकारी स्कूलों के 96% विद्यार्थियों का वैक्सीनेशन हो चुका है. जबकि प्राइवेट स्कूलों के 70% विद्यार्थियों को वैक्सीन लग चुकी है. खास बात यह है कि वैक्सीन लगवाने के मामले में शहरी किशोर ग्रामीण किशोरों से पीछे हैं.
स्वास्थ्य विभाग के सर्वे के दौरान यह भी सामने आया है कि स्कूलों की छुट्टियां होने के कारण प्राइवेट हों या फिर सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी आउट ऑफ स्टेशन हैं. इसी तरह जिलें में 1150 किशोरों के अभिभावक अभी तक इस असमंजस में पड़े हुए हैं कि वैक्सीन लगवाएं या नहीं. कैथल उपायुक्त प्रदीप दहिया ने बताया कि वैक्सीन हर तरह से फायदेमंद है और इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है. ऐसे में अभिभावकों से अपील की जाती है कि वो अपने बच्चों का टीकाकरण जरुर करवाएं.
