करनाल | प्याज सब्जी एवं मसाले की प्रमुख फसल है. औषधीय गुण होने से इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है. खरीफ प्याज की खेती को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान सलारू (करनाल) के कृषि विशेषज्ञों ने प्याज की नई किस्म L- 883 ईजाद की है. मध्य फरवरी से पहले इस किस्म की बिजाई कर लें. इस किस्म की जून-जुलाई में तैयार हुई पौध की रोपाई कर सकते हैं. अधिक गर्मी या बरसात के कारण पौध खराब होने की संभावना बढ़ जाती है. ऐसे में गंठियों को बनाना जरूरी हो जाता है.
गंठियों को छांटकर हवादार स्थान पर पत्तियों सहित जुलाई से लेकर मध्य अगस्त तक भंडारण करके रख सकते हैं. इसके लिए सही तकनीक की जानकारी होना आवश्यक है. किसान कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर ही बिजाई करें.
दो नई किस्में ईजाद
L- 883: प्याज की इस नई किस्म की गांठें गोल आकार एवं चमकते गहरे लाल रंग की होती हैं. यह किस्म 75 से 85 दिन में तैयार होती है. इसकी उत्पादन क्षमता 300- 325 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है.
एग्रीफाउन्ड डार्क रेड: इस किस्म की गंठियां गोल आकार एवं गहरे लाल रंग की होती है. यह किस्म भी 75 से 80 दिन में तैयार होती है. 250- 300 क्विंटल तक इसका उत्पादन रहता है.
गंठियां बनने का समय
गंठियों की रोपाई के लिए 40 से 45 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से बीज मात्रा होनी चाहिए. बीज से गंठिया बनाने का उपयुक्त समय 15 जनवरी से 15 फरवरी तक रहता है. ऐसे में बीज की बिजाई के लगभग 10 से 15 दिन बाद वाविस्टीन 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से ड्रेन्चिग करते हैं, जिससे पौधग्लन रोग (आर्दग्लन रोग) से बचाव होता है. 30 दिन और 45 दिन पर 19:19:19 10 ग्राम प्रति लीटर एम- 45 2.5 ग्राम/ लीटर और फिप्रोनिल 1 मिली/ लीटर दवा का 15 दिनों के अन्तराल पर छिड़काव करने से गंठियां अच्छी बनती है.
गंठियों की खुदाई से 15 दिन पहले 1 ग्राम कार्बेन्डाजिम का छिड़काव करके भंडारण में गंठियों को सड़ने से बचाया जा सकता है. बीज बुवाई से 75 से 80 दिनों में गंठियां तैयार हो जाती हैं. गंठियों की रोपाई का मुख्य समय 10 से 15 अगस्त तक होता है.
