स्पेशल रिपोर्ट: हरियाणा के कई किसान नेताओं के निशाने पर टिकैत, ये है बड़ी वजह? 

बहादुरगढ़ । तीनों नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे आंदोलन के बीच वैसे तो भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत को बड़ा चेहरा माना जा रहा है और आंदोलन को पुनर्जीवित करने का श्रेय उन्हीं के आंसुओं को दिया जा रहा है, लेकिन वही राकेश टिकैत हरियाणा के कई किसान नेताओं के निशाने पर भी है. इनमें से कुछ नेता तो सीधे नाम लेकर ही टिकैत पर आरोप लगाते हैं, जबकि कुछ नेता बिना नाम लिए ही राकेश टिकैत को आंदोलन के लिए ठीक न होने की बात कह रहे हैं. 

RAKESH TEKIAT

नुक़सान उठाती है हरियाणा की जनता

ऐसे किसान यह तर्क दे रहे हैं कि जब भी कोई आंदोलन होता है तो सिर्फ हरियाणा की जनता को नुकसान उठाना पड़ता है. क्या हमारा खून इतना सस्ता और मीठा हो गया है कि बाहरी लोग आकर हमें खून की होली खिलवाते रहते हैं. इस तरह के तर्क में बाहरी का इशारा राकेश टिकैत की तरफ ही है. हरियाणा के किसानों का कहना है कि नौ महीने से पूरे आंदोलन में उत्तर प्रदेश के अंदर प्रशासन व किसानों के बीच कोई टकराव की स्थिति पैदा नहीं हुई. जबकि वहां भी भाजपा की सरकार है और हरियाणा में भी भाजपा की सरकार है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि सिर्फ हरियाणा के अंदर ही प्रशासन और किसानों के बीच टकराव करवाने के लिए प्रदेश से बाहर के कुछ किसान नेताओं द्वारा भड़काऊ स्थिति पैदा की जाती है. 

26 नवंबर से आज तक किसानों का रणक्षेत्र हरियाणा काे ही बनाया गया है. हरियाणा के किसान नेता प्रदीप धनखड़ का कहना है कि प्रदेश के किसानों को समझना चाहिए कि उत्तर प्रदेश के उस टोपी वाले किसान नेता से यह जवाब मांगना चाहिए कि उप्र के अंदर भाजपा के नेताओं का बहिष्कार क्यों नहीं करवाया जा रहा है. जबकि वहां पर यदि इस तरह का फैसला प्रभावी ढंग से हो तो सरकार पर दबाव बढ़ सकता है. 

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करनाल में पुलिस और किसान आमने-सामने 

करनाल में कल बीजेपी की विशेष बैठक आयोजित की गई थी जिसमें हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खटर व बीजेपी विधायक व मंत्री ओपी धनखड़ पहुंचे थे. उधर किसानों ने बसताड़ा टोल प्लाजा पर इक्कठे होकर बैठक के विरोध को लेकर रणनीति बनाई. जिसके बाद टोल प्लाजा पर किसानों पर लाठीचार्ज हुआ और कई किसान घायल हो गए. बीजेपी की विशेष बैठक के विरोध का किसानों ने रात को ही आह्वान कर दिया था. पुलिस ने चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा कर दी थी, बेरिकेट्स लगाए थे. पुलिस ने करनाल को किले में तब्दील कर दिया. सभी किसान बसताड़ा टोल प्लाजा पर इक्कठा होना शुरू होते हैं, प्रदर्शन करते हैं, सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हैं, एक-2 गाड़ियां जो बीजेपी के नेताओं की थी उन्हें रोकने का प्रयास किया जाता है, जिसके बाद किसान हाईवे पर ही जाम लगाकर बैठ जाते हैं.

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उसके बाद पुलिस और किसान टोल प्लाजा पर आमने सामने हो जाते हैं और फिर लाठीचार्ज शुरू हो गई. किसानों के ऊपर लाठियां बरसाई गई है. कई किसान घायल हुए हैं कई को चोट लगी है. सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी जारी रहती है. किसानों का कहना है कि शांतिपूर्वक तरीके से विरोध किया जा रहा था फिर पुलिस ने लाठियां क्यों बरसाई.

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गौरतलब है आंदोलन के बीच वैसे तो भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत को बड़ा चेहरा माना जा रहा है और आंदोलन को पुनर्जीवित करने का श्रेय उन्हीं के आंसुओं को दिया जा रहा है. लेकिन वही किसान नेता राकेश टिकैत हरियाणा के कई किसान नेताओं के निशाने पर भी हैं. 

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