केन्द्र सरकार के अफसर ने बताई खास बात, खुश हो सकते हैं दिल्ली, हरियाणा और यूपी के लाखों लोग

नई दिल्ली । बुलेट ट्रेन चलाने के अपने लक्ष्य को हासिल करने में सरकार भले ही लेट हो गई हो लेकिन रैपिड ट्रेन चलाने के लक्ष्य को लेकर सरकार पूरी रफ्तार दिखा रही हैं. ऐसे में क्या होगा रैपिड ट्रेन का किराया, दिल्ली- मेरठ के बाद अगला कॉरिडोर कौनसा रहेगा, ऐसे ही कुछ सवालों पर केन्द्रीय आवास और शहरी विकास मंत्रालय के सचिव मनोज जोशी ने विस्तार से जानकारी दी है…

Delhi Metro

आगे क्या शेड्यूल रहेगा

मार्च 2023 से परिचालन के निर्धारित शेड्यूल को देखते हुए साहिबाबाद से दुहाई तक 17 किमी ट्रैक का निर्माण कार्य पूरा होने को है तो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रीय परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) को पहला ट्रेनसेट भी मिल गया है. सप्ताह भर में यह ट्रेन सेट दुहाई डिपो पहुंच जाएगा. वहां पर इसकी असेंबलिंग और सुरक्षा जांच का कार्य पूरा होगा. कुछ महीने में इसका ट्रायल रन शुरू हो जाएगा और कुछ अन्य ट्रेन सेट भी आ जाएंगे. हमारी पूरा प्रयास रहेगा कि तय शेडयूल यानि मार्च 2023 तक इस प्राथमिकता खंड पर ट्रेन का परिचालन शुरू कर दिया जाए.

क्या रहेगा किराया

मनोज जोशी ने बताया कि इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 30 हजार करोड़ रुपए खर्च हुआ है, लिहाजा रिकवरी भी जरुरी है, जिससे ऋण की धनराशि लौटाई जा सकें. किराया इसी हिसाब से तय किया जाएगा कि अधिक से अधिक यात्री इसमें सफर का आनंद उठा सकें लेकिन यह इतना कम भी नहीं होगा कि ट्रेन में बहुत ज्यादा भीड़ बढ़ जाएं.

ट्रैक पर अगला कारिडोर कौन सा होगा, दिल्ली-अलवर या दिल्ली- पानीपत

निस्संदेह दिल्ली-अलवर कारिडोर की प्राथमिकता पहले रहेगी. इस संबंध में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और निर्माण पूर्व गतिविधियों सहित तैयारी भी पूरी कर ली गई है. यूटिलिटी डायवर्जन का काम पूरा होने वाला हैं और कारिडोर पर सड़क चौड़ीकरण, पाइपलाइनों की शिफ्टिंग और बिजली की हाई टेंशन लाइनों का काम भी चल रहा है. राज्य सरकारों की मंजूरी पहले ही मिल चुकी हैं और अब केवल केंद्र सरकार की स्वीकृति का इंतजार है.

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दिल्ली- पानीपत कॉरिडोर को लेकर मनोज जोशी ने बताया कि इसकी डीपीआर लंबे समय से दिल्ली सरकार के पास विचाराधीन है. उसकी मंजूरी मिलने के बाद ही इस रूट पर आगे बढ़ा जा सकता है. इस विषय पर और अधिक जानकारी केन्द्रीय आवास और शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी ही बेहतर ढंग से दे पाएंगे.

रैपिड ट्रेन किस तरह से शहरों की परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाएगी

मनोज जोशी ने बताया कि रैपिड ट्रेन लंबी दूरी के लिए एक बड़ा और बेहतर परिवहन साधन साबित होगी. एनसीआर के शहरों को यह दिल्ली के और करीब लाएगी. अर्थव्यवस्था को गति और रोजगार के अवसर पैदा होंगे. सबसे अहम बात यह भी है कि प्रदूषण मुक्त परिवहन का यह साधन दिल्ली सहित एनसीआर के शहरों की लगातार बढ़ती आबादी की जरूरतों को भी पूरा करेगा.

वंदे भारत और मेट्रो ट्रेन से रैपिड ट्रेन किस तरह अलग है

वंदे भारत सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए डिजाइन की गई हैं और मेट्रो छोटी दूरी के लिए है. रैपिड ट्रेन इन दोनों के बीच की ट्रेन कही जा सकती है. यह पूरी तरह मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट पर आधारित है.

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Ajay Sehrawat
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मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ.