Big Update: रेल मंत्री ने दी बड़ी जानकारी, प्रीमियम ट्रेनों में सफर करना होगा सस्ता

नई दिल्ली | रेलवे यात्रियों के लिए मोदी सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है जिससे महंगाई की चौतरफा मार झेल रहे मुसाफिरों को कुछ हद तक राहत मिल सकती है. दरअसल कोरोना महामारी से हालात सामान्य होने के बावजूद भी रेलवे ने ट्रेनों में यात्रियों को मिलने वाली कई तरह की रियायतें बहाल नहीं की है, जिससे रेलवे यात्रियों की संख्या के आंकड़े में गिरावट देखने को मिली हैं.

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प्रीमियम ट्रेनों में सफर करना होगा सस्ता

अब रेलवे यात्रियों की संख्या का आंकड़ा बढ़ाने के लिए शताब्दी और दुरंतो जैसी एक्सप्रेस ट्रेनों में डायनैमिक किराए को खत्म करने पर विचार कर रही है. यात्रियों का निगेटिव रिस्पांस और पैसेंजर्स की संख्या के आंकड़े में गिरावट को देखते हुए क्या सरकार डायनैमिक किराए की व्यवस्था को वापस लेने पर विचार कर रही है तो इसके जवाब में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि फिलहाल सरकार की फ्लेक्सी फेयर पॉलिसी को वापस लेने की कोई योजना नहीं है.

रेल मंत्री ने दी जानकारी

डायनैमिक किराया प्रणाली पर जानकारी देते हुए रेल मंत्री ने बताया कि इस प्रणाली के तहत किराया डिमांड के हिसाब से निर्धारित होता है. इस प्रणाली में 10 फीसदी सीटें बुक होते ही किराया भी 10 फीसदी बढ़ जाता है और जैसे- जैसे सीट कम होती रहती है वैसे- वैसे किराया बढ़ता जाता है. हालांकि ये प्रणाली सभी तरह की ट्रेनों में लागू नहीं हैं.

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रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी देते हुए बताया कि यह व्यवस्था 9 सितंबर 2016 को राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी एक्सप्रेस ट्रेनों में लागू की गई थी. लेकिन अब कई रूट्स पर किराया हवाई जहाज से भी महंगा हो गया है जिसके चलते लोग हवाई यात्रा को तवज्जो देने लगे हैं क्योंकि ट्रेन के मुकाबले हवाई जहाज से यात्रा करने पर समय और पैसा दोनों की बचत हो रही है.

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यात्रियों की संख्या का गिरा आंकड़ा

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कोरोना महामारी के दौर से पहले फ्लेक्सी फेयर सिस्टम में पैसेंजर और ट्रेनों से होने वाली कमाई नॉन- फ्लेक्सी से ज्यादा थी लेकिन फिर भी सरकार की इस पॉलिसी को वापस लेने की फिलहाल कोई योजना नहीं है. रेल मंत्री ने कहा, ‘रेलवे और एयरलाइन ट्रांसपोर्ट के दो अलग-अलग मोड हैं. वॉल्यूम, कनेक्टिविटी और सुविधा के मामले में इनकी तुलना नहीं हो सकती है.

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रेल मंत्री ने कहा कि एयरलाइंस में अधिकतम किराए की सीमा तय नहीं होती है जबकि रेलवे द्वारा पूरे साल का अधिकतम किराया तय किया जाता है. एयरलाइंस का किराया कई फैक्टर्स पर निर्भर करता हैं जबकि रेलवे का किराया कम या ज्यादा होता रहता है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस श्रेणी में सफर कर रहे हैं. यह यात्री की इच्छा पर निर्भर करता है कि वह रेल सेवा का आनंद लेना चाहता है या एयरलाइंस का.

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