नई दिल्ली, Indian Railway Update | अगर आप भी अक्सर ट्रेन में सफर करते हैं, तो आज की यह खबर आपके लिए है. हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में रेल सेवा की शुरुआत सन 1853 में हुई थी. इस दौरान ट्रेन में टॉयलेट की सुविधा नहीं होती थी यात्रियों को स्टेशन पर उतरकर जरूरतों को पूरा करने के लिए जाना पड़ता था. इसी दौरान एक भारतीय शख्स की चिट्टी से रेलवे की तरफ से अपनी सुविधाओं में बड़ा बदलाव लाया गया और शौचालय की सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई. आज हम आपको इसी के बारे में जानकारी देने वाले हैं.
टॉयलेट की सुविधा
ओखिल चंद्र सेन की चिट्ठी से ही रेल में बड़ा बदलाव आया और ट्रेनों में शौचालय बनाए जाने लगे. ट्रेनों में टॉयलेट की सुविधा इस वजह से भी शुरू की गई, जिससे कि यात्रियों को सफर के दौरान किसी प्रकार की कोई भी परेशानी का सामना न करना पड़े. सन 1909 में ओखिल चंद्र सेन ने पत्र लिखकर ट्रेनों में टॉयलेट शुरू करने का आह्वान किया. साल 2016 में इंजन में टॉयलेट की सुविधा भी शुरू कर दी गई. इसके बाद, साल 2021 आते- आते भारतीय रेलवे ट्रेनों में 2. 58 लाख बायो टॉयलेट लगे, जो पर्यावरण के लिए भी एकदम बेहतरीन है.
तत्काल रेल मंत्री ने निभाई थी अहम भूमिका
सन 1909 में लिखी गई चिट्ठी से ट्रेनों में टॉयलेट लगने तो शुरू हो गए, परंतु अगले 100 साल भी लोको पायलट को इस सुविधा का लाभ नहीं मिला. उन्हें साल 2016 तक जाकर कहीं ट्रेन की सुविधा मिली, ड्राइवर को कई घंटे तक बिना टॉयलेट के काम करना पड़ता था, परंतु साल 2016 के बाद नए इंजनों में टॉयलेट लगाए गए जिससे की ड्राइवर को राहत मिली और तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने इसमें काफी बड़ी भूमिका निभाई थी.
ओखिल ने पत्र के बाद ब्रिटिश रेलवे अधिकारियों ने 1909 में 80 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी में टॉयलेट शुरू करने की योजना की. पहले इसे केवल हाई क्लास कोच में ही शुरू किया गया था फिर 1940 आते- आते सभी रेल कोच में टॉयलेट को अनिवार्य कर दिया गया. इससे यात्रियों को भी बड़ी राहत मिली.
