नई दिल्ली | रुपए की गिरावट का असर अब आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू उपकरणों और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स TV, वाशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर आदि की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. मई के आखिर या जून के पहले सप्ताह से कीमतों में 3-5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है. ऐसा इसलिए होगा क्योंकि मैन्युफैक्चरर्स बढ़ती लागत का असर खरीदारों पर डाल सकते हैं.
डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट है कारण
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की गिरावट ने मैन्युफैक्चरर्स पर संकट के बादल और बढ़ा दिए हैं क्योंकि आयातित घटक महंगे हो गए हैं. यह उद्योग मुख्य रूप से प्रमुख घटकों के आयात पर निर्भर करता है. कोरोना महामारी के चलते शंघाई में सख्त लॉकडाउन से इसके बंदरगाह पर कंटेनरों के ढेर लग गए हैं. इससे भी पार्ट्स की कमी हो गई है.
कच्चे माल की कीमतों में जबरदस्त उछाल
कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड अप्लायंसेज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (CEAMA) के मुताबिक डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का कमजोर होना उद्योग के लिए और ज्यादा परेशानी खड़ी कर रहा है. कच्चे माल की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है और अब अमेरिकी डॉलर की मजबूती और भारतीय रुपए की कमजोरी चिंता का विषय है.
सभी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अब bottom line देख रही हैं. जून से, हम कीमतों में 3 से 5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखेंगे. CEAMA के अध्यक्ष एरिक ब्रेगांजा ने कहा कि अगर डॉलर अभी भी भारतीय रुपये के मुकाबले 77.40 रुपये पर बना रहता है तो कंपनियों के लिए मुश्किल होगा.
