पानीपत में 20 उद्योग कर रहे सैनिकों की पोशाक तैयार, यहाँ पढ़ें खास बातें

पानीपत | एक तरफ भारत सरकार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए हथियार बनाने पर काम कर रही है. इसी क्रम में हथकरघा और कपड़ा उत्पाद बनाने में दुनिया भर में अपनी पहचान बना चुके पानीपत के उद्योगपतियों ने अब देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के लिए जूते का कपड़ा बनाने की मशीनें बनाने का काम शुरू कर दिया है.

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20 उद्योग लगे कपड़ा मशीनरी के निर्माण में

लगभग 20 उद्योग कपड़ा मशीनरी के निर्माण में लगे हुए हैं. पानीपत के उद्यमियों ने भी कंधे से कंधा मिलाकर काम करना शुरू कर दिया है. पानीपत के उद्यमियों ने विशेष शिल्प, रोवर्स, मिजाइलें, यहां तक ​​कि सैनिकों द्वारा उपयोग किए जाने वाले जूते के कपड़े बनाने के लिए मशीनें बनाना शुरू कर दिया है.

इनमें चादरें, पर्दे के कपड़े और कालीन बनाने की मशीनें बनाई जाती हैं. पहले एक माह में 3 हजार मीटर कपड़ा बनता था. यहां के उद्यमियों ने ऐसी मशीनें बनाई हैं, जिन पर एक ही दिन में कपड़े के 3 हजार टुकड़े तैयार हो जाते हैं. लाइफ रॉकेट के लिए स्टील फैब्रिक की आवश्यकता होती है, जो स्टील से अधिक मजबूत होता है लेकिन वजन में हल्का होता है. ऐसे कपड़ों के लिए भी यहां मशीनें बनाई जा रही हैं.

यूरोप तक पहुंचीं पानीपत की मशीनें

रामजीत बताते हैं कि हम टेक्निकल टेक्सटाइल, इंडस्ट्रियल टेक्सटाइल, विशेष प्रयोजनों के लिए बनने वाले उत्पादों की मशीनें बना रहे हैं. हम 12 मीटर चौड़ाई तक कपड़ा बनाने वाली बॉर्डर लूम मशीन बनाने में सफल हुए हैं. अभी तक 3-4 मीटर तक चौड़े कपड़े बनाने की मशीनें थीं. अब हमारी मशीनें यूरोप पहुंचने लगी हैं. रक्षा अधिकारी हमें अपनी जरूरतें बता रहे हैं और हम उसके अनुसार मशीनें बना रहे हैं. डिफेंस से हमें पूरा सहयोग मिल रहा है और उद्यमी भी उनकी जरूरतों को पूरा कर रहे हैं.

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दशमेश उद्योग बना रहा मशीनें

1979 से कपड़ा मशीनरी बनाने वाली दशमेश कार्ड और पावर लूम ने रक्षा की जरूरतों को पूरा करने के लिए मशीनें बनाना शुरू कर दिया है. दशमेश इंडस्ट्री के मालिक रामजीत सिंह का कहना है कि उन्हें शुरू से ही नये उत्पाद बनाने में रुचि रही है. उन्होंने ही जूट और नारियल की रस्सी से धागा बनाने की मशीन बनाई थी, जिससे कालीन बनाये जाते हैं हाथ से बने उत्पादों को मशीनरी की ओर मोड़ने पर काम किया. इसी कारण से, पानीपत के उद्यमी विदेशों से प्रतिस्पर्धा में टिकने में सक्षम हैं.

पानीपत में हैंड नॉटेड कालीन बनाने में इस्तेमाल होने वाली कई मशीनें डिफेंस को सौंप दी गई हैं, उनकी जगह अब ऑटोमैटिक मशीनों पर कालीन बनाए जा रहे हैं. हमारा एक ही लक्ष्य रहा है कि हर कोई अपने लिए काम करे, ऐसा काम किया जाए जो देश के हित में हो. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की रक्षा के मामले में आत्मनिर्भर बनने की पहल की है. उसके तहत हम रक्षा की जरूरतों के मुताबिक, मशीनरी बना रहे हैं. इसे अच्छी प्रतिक्रियाएं भी मिल रही हैं. डिफेंस को कई मशीनें दी गई हैं.

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Pravesh Chauhan
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मेरा नाम प्रवेश चौहान है. मीडिया लाइन में पिछले 4 वर्ष से काम कर रहा हूँ. मैंने पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की है.