सिरसा | हरियाणा के सिरसा जिले की अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी सविता पूनिया को देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है. मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपति मूर्मू ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया. भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान और मौजूदा गोलकीपर सविता पूनिया को महिला हॉकी की “द ग्रेट वॉल” के नाम से जाना जाता है.

पद्मश्री सम्मान मिलने पर सविता ने खुशी जताते हुए कहा कि यह उनके जीवन का बेहद खास और गौरवपूर्ण पल है. उन्होंने कहा कि जब उन्होंने हॉकी खेलना शुरू किया था, तब कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उन्हें देश के इतने बड़े नागरिक सम्मान से नवाजा जाएगा. उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय अपने परिवार, कोच और टीम को दिया.
टोक्यो ओलंपिक में मिली पहचान
सविता ने बताया कि उनके खेल जीवन में कई ऐसे अवसर आए जब उन्हें लगा कि शायद हॉकी छोड़नी पड़ेगी लेकिन परिवार के निरंतर सहयोग और विश्वास ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी. उन्होंने कहा कि मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली लड़कियों के लिए यह संदेश है कि अगर परिवार का साथ मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल कर सकती हैं. सविता पूनिया को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक पहचान टोक्यो ओलंपिक में मिली थी. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उन्होंने आठ पेनल्टी कॉर्नर बचाकर भारतीय टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई थी. इसके बाद, उन्हें “द ग्रेट वॉल” के नाम से पहचान मिली. उनकी शानदार गोलकीपिंग की दुनियाभर में सराहना हुई थी.
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने सुश्री सविता पूनिया को खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया। सुश्री पूनिया भारतीय महिला राष्ट्रीय फील्ड हॉकी टीम की पूर्व कप्तान और वर्तमान गोलकीपर हैं। उन्हें भारतीय महिला टीम की ‘द ग्रेट वॉल’ के नाम से भी जाना… pic.twitter.com/9nIwR8kcfq
— President of India (@rashtrapatibhvn) June 23, 2026
अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित
इससे पहले 2018 में सविता को अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है. वह लगातार तीन बार एफआईएच गोलकीपर ऑफ द ईयर का पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं. इसके अलावा वह सिरसा जिले में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की ब्रांड एंबेसडर भी रह चुकी हैं. टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारतीय महिला हॉकी टीम ने चौथा स्थान हासिल किया था, जिसमें सविता उपकप्तान थीं. वह पीआर श्रीजेश के बाद 300 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली दूसरी भारतीय गोलकीपर हैं. उनकी कप्तानी में भारतीय महिला टीम ने 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीता था. टीम ने एफआईएच नेशंस कप का खिताब भी अपने नाम किया.
यहां हुआ जन्म
सविता का जन्म 11 जून 1990 को सिरसा जिले के जोधकां गांव में हुआ था. उनके पिता महेंद्र सिंह स्वास्थ्य विभाग से फार्मासिस्ट पद से सेवानिवृत्त हैं जबकि माता लीलावती गृहिणी हैं. सविता अपने दादा रणजीत सिंह को अपना रोल मॉडल मानती हैं. उन्हीं की प्रेरणा से उन्होंने हॉकी खेलना शुरू किया. शुरुआती प्रशिक्षण सिरसा की अग्रसेन नर्सरी और बाद में हिसार के साई सेंटर में लिया. 2007 में उनका चयन भारतीय सीनियर राष्ट्रीय हॉकी कैंप के लिए हुआ और 2011 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की.