मां के गर्भ में पल रहा था बेटा, कारगिल युद्ध में पिता हुए शहीद; 20 साल बाद पूरा किया परिवार का ये सपना

महेंद्रगढ़ | कारगिल युद्ध में हरियाणा के कई जवान शहीद हुए थे. कारगिल दिवस के अवसर पर आज हम एक जवान के परिवार की कहानी बताने जा रहे हैं कारगिल युद्ध में हरियाणा के महेंद्रगढ़ निवासी लेखराम की शहादत के समय उनकी पत्नी दो माह की गर्भवती थीं. बाद में वीरांगना कृष्णा देवी निवासी सोहला ने एक छोटे बेटे को जन्म दिया. बेटे के जन्म के समय ही तय कर लिया था कि वह अपने बेटे को सेना में भेजेंगी. जब बेटा बड़ा हुआ तो उन्होंने उसे सेना में भर्ती होने के लिए प्रोत्साहित किया. वह उसे अपने पिता के बारे में कहानियाँ सुनाती रही.

Shahid Lekhram Mahendragarh

मां ने पिता की तरह बेटे को बनाया सिपाही

बेटे ने भी अपने पिता शहीद लेखराम के नक्शेकदम पर चलने का फैसला किया. महज 20 साल की उम्र में वीरांगना का बेटा अपने पिता की बटालियन अल्फा कंपनी ग्रेनेडियर 18 में सिपाही के पद पर भर्ती हो गया. वर्तमान में बेटा काला पानी में चीन सीमा पर देश की सेवा कर रहा है. बड़ा बेटा कर्मपाल अपने गांव सोहला का सरपंच है.

बेटा पिता की बहादुरी की कहानी सुनकर हुआ बड़ा

वीरांगना कृष्णा देवी ने बताया कि 8 अप्रैल 1999 को उनके पति छुट्टी बिताकर ड्यूटी पर गये थे. घर से निकलते वक्त उन्होंने जल्द आने का वादा किया था, लेकिन 3 जुलाई 1999 को उनकी शहादत की खबर आई. जब उनका शव लाया गया तो वह अपने पति को पहचान भी नहीं पाईं. ऐसा लग रहा था मानों उसकी पूरी दुनिया ख़त्म हो गयी हो.

शहादत के बाद जीजा ने किया पूरा सहयोग

बड़ा बेटा कर्मपाल केवल आठ साल का था, बड़ी बेटी पूनम 6 साल की थी, छोटी बेटी मनीषा 2 साल की थी जबकि छोटा बेटा के समय वह 2 महीने की गर्भवती थी. बाद में, सरकार द्वारा उन्हें गैस एजेंसी आवंटित कर दी गई. उनकी शहादत के बाद जीजा ने पूरा सहयोग किया.

ऐसे हुए थे लेखराम शहीद

बता दें कि गांव सोहला निवासी हवलदार लेखराम ऑपरेशन विजय के दौरान बटालिक सेक्टर में 22 ग्रेनेडियर्स अल्फा कंपनी के फायर बेस क्षेत्र में हथियार और गोला- बारूद पहुंचाने के लिए पुनर्निर्माण और सहायता संगठन का हिस्सा थे. 3 जुलाई 1999 को सुबह 11 बजे घनघास इलाके में दुश्मन की ओर से भारी गोलाबारी के बावजूद उन्होंने अपने साथियों को हथियार और गोला-बारूद पहुंचाना जारी रखा. इस दौरान उनके पेट में रिफ्रैक्टरी स्प्लिंटर लग गया. इससे वह वीरगति को प्राप्त हो गये थे.

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Pravesh Chauhan
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मेरा नाम प्रवेश चौहान है. मीडिया लाइन में पिछले 4 वर्ष से काम कर रहा हूँ. मैंने पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की है.