महेंद्रगढ़ | हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) महेंद्रगढ़ के प्रोफेसर व 2 अन्य विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों की टीम ने मिलकर कन्वर्टेबल सोलर पावर रोबोट तैयार किया है. यह रोबोट न केवल कृषि में अंधाधुंध होने वाले रसायनों के प्रयोग को रोकने में मदद करेगा, बल्कि फसलों में होने वाले विभिन्न रोगों की पहचान कर उन्हें नुकसान से भी बचाएगा.
ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक पर आधारित इस शोध के लिए हकेंवि में विद्युत अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर आकाश सक्सेना, केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के डॉ. उदय प्रताप सिंह व वेलोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के डॉ. सिद्धार्थ सिंह चौहान को इस कार्य के लिए पेटेंट भी प्राप्त हुआ है.
AI तकनीक पर आधारित
प्रो.आकाश सक्सेना ने बताया कि यह रोबोट प्रथम चरण में ही रोग की पहचान कर आवश्यकतानुसार ही फसलों में रसायन का छिड़काव करने में सक्षम है. AI तकनीक पर आधारित रोबोट पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित है. WiFi और रिमोट के जरिए इसे 300 मीटर तक कंट्रोल किया जा सकता है.
उन्होंने बताया कि आवश्यकता के अनुसार इसमें बिजली का भी प्रयोग किया जा सकता है. इस रोबोट में सेंसर लगाए है, जो पौधों की इमेज लर्निंग प्रोसेसिंग कर मेमोरी में सुरक्षित कर लेगा और फिर उसी के आधार पर संचालित होगा. प्रो. आकाश सक्सेना ने बताया कि इस तकनीक से फसलों में समय से रोग की पहचान व रोकथाम संभव होगी.
परिवहन पर नहीं होगा अतिरिक्त खर्च
अफोर्डेबल होने के कारण इसे सूटकेस के आकार में बदला जा सकेगा और इससे इसके परिवहन पर भी अतिरिक्त खर्च करने की आवश्यकता नहीं होगी. यह रोबोट किसी भी फसल के पौधों की तस्वीर खींचकर एक्सपर्ट सिस्टम में भेजता है. इसके बाद, फसल में होने वाले रोग की पहचान करके AI तकनीक के माध्यम से स्वयं ही रोग की रोकथाम के सुझाव भी देता है.
