संघर्ष से सफलता तक की अनोखी कहानी, राष्ट्रपति भवन तक पहुंची भिवानी की बेटी सुलेखा कटारिया

भिवानी | अक्सर जब भी समाज में महिला विभूतियों की बात होती है, तो हमारे जेहन में वे चेहरे ही सामने आते हैं, जिनके नाम सबने सुने होते हैं. देश के छोटे गांवों और शहरों में भी महिला प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है. भले ही उन्हें वह नाम और शोहरत न मिली हो, जो बाकी लोगों को मिली है. सरकारें अपनी तरफ से प्रयास करती हैं कि ऐसी महिलाओं को आगे लाया जाए, जो दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत साबित हो. बाकी महिलाओं को भी उनसे कुछ सीखने को मिले और वे जीवन में कामयाब होने के लिए प्रेरित हों.

Sulekha Kataria Bhiwani

राष्ट्रपति भवन से मिला न्यौता

ऐसा ही एक उदाहरण है हरियाणा के भिवानी जिले के छोटे से गांव ढाबढाणी की सुलेखा कटारिया का. हाल ही में सुलेखा की बनाई पेंटिंग को देश की टॉप 15 पेंटिंग्स में शामिल किया गया और राष्ट्रपति भवन में उन्हें राष्ट्रपति से मिलने के लिए आमंत्रित किया गया. जब सुलेखा को इस बात की सूचना मिली, तो यह मानो उनके लिए एक सपना सच होने जैसा था. दरअसल, मार्च 2024 में दिल्ली के पुराना किला में एक राष्ट्रीय वर्कशॉप का आयोजन हुआ था. इसकी थीम थी- “विकसित भारत: विजन 2047”. इस प्रतियोगिता में सुलेखा के साथ देश भर के अनेक कलाकार शामिल हुए.

पेंटिंग से मिली पहचान

इस दौरान सुलेखा ने एक विशेष चित्र बनाया- ’भारत का मानचित्र’, जिसमें हाल ही में लॉन्च हुए चंद्रयान को दर्शाया गया था और भारत के माथे पर हरियाणा की शान पगड़ी को विशेष रूप से उकेरा गया था. इसी पेंटिंग से उन्हें पहचान मिली और उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया. सुलेखा को राष्ट्रपति भवन से फोन करके बताया गया कि उनकी पेंटिंग को टॉप 15 पेंटिंग्स में शामिल किया गया है और उन्हें राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया गया है. इसके बाद तो जैसे सुलेखा के सपनों को नई उड़ान मिल गई थी.

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर वह काफी अभिभूत हुईं और राष्ट्रपति ने भी उनकी पेंटिंग की काफी तारीफ की. सुलेखा बताती हैं कि उन्हें सबसे अच्छी बात यह लगी कि उनकी पेंटिंग को राष्ट्रपति भवन के एक विशेष हाल में स्थायी रूप से प्रदर्शित किया गया है.

कठिन परिस्थितियों में गुजरा बचपन

सुलेखा का बचपन कठिन परिस्थितियों में गुजरा और उन्होंने हालातों से लड़कर यह मुकाम हासिल किया. उनके पिता छोटे किसान हैं और साथ ही दर्जी का काम भी करते हैं. गांव के सरकारी स्कूल से उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और कॉलेज की पढ़ाई राजीव गांधी महिला महाविद्यालय, भिवानी से पूरी की. उसके बाद, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की.

दूसरों के लिए बनीं प्रेरणा

अगर परिवार की बात करें, तो उनके घर में चार भाई- बहन हैं. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के मुखिया पिता की कमाई इतनी भी नहीं थी कि वह पढ़ाई का खर्च उठा पाते. सुलेखा ने वह दिन भी देखे हैं, जब उनके पास कॉलेज की फीस भरने और यहाँ तक कि ऑटो का किराया देने तक के पैसे नहीं होते थे, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेके और अपनी मेहनत के दम पर सफलता प्राप्त की. आज सुलेखा अपने जैसी अन्य महिलाओं को भी जीवन में मेहनत के दम पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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Nisha Tanwar
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