ज्योतिष | हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को विशेष महत्व प्राप्त है, यह व्रत हर महीने के कृष्ण व शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. इस महीने चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 10 अप्रैल को है. इस तिथि की शुरुआत 9 अप्रैल से हो रही है, परंतु उदय तिथि के अनुसार व्रत रखना 10 अप्रैल को ज्यादा अच्छा रहेगा. इस दिन भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा अर्चना करने का विधान है. आज हम आपको इसी व्रत के बारे में जानकारी देने वाले हैं.
कब है प्रदोष का व्रत
प्रदोष व्रत को रखने से भगवान शिव की कृपा से आपको मन वांछित फल की प्राप्ति होती है. हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को ही गुरु प्रदोष का व्रत रखा जाता है. प्रदोष व्रत के दिन गुरुवार होने की वजह से इसे गुरु प्रदोष व्रत भी कहा जाता है, बता दे की 9 अप्रैल को रात 10:55 से त्रयोदशी तिथि की शुरुआत हो रही है और अगले दिन रात 1:00 इस तिथि का समापन होगा. ऐसे में उदय तिथि के अनुसार 10 अप्रैल को ही प्रदोष व्रत रखा जाएगा. पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 6:44 से 8:59 का रहने वाला है.
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
चैत्र महीने में पडने वाले दोनों प्रदोष गुरु प्रदोष है, इससे पहले 27 मार्च को भी गुरु प्रदोष का व्रत ही था. गुरु प्रदोष की पूजा शाम को प्रदोष काल में की जाती है. इस प्रदोष की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 6:44 मिनट से शुरू होता है जो 8:59मिनट तक रहने वाला है. 2 घंटे आपको पूजा के लिए प्राप्त समय मिलने वाला है, हिंदू धर्म में इस व्रत को विशेष महत्व प्राप्त है. अगर आप भी चाहते हैं कि आपकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाए, तो आपको प्रदोष का व्रत अवश्य ही रखना चाहिए. इसके रखने से भगवान भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते है.
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं विभिन्न माध्यमों/ ज्योतिषियों/ पंचांग/ प्रवचनों/ मान्यताओं/ धर्मग्रंथों पर आधारित हैं. Haryana E Khabar इनकी पुष्टि नहीं करता है.
