नई दिल्ली | हिंदुस्तान के लिए नए फसल वर्ष की शुरुआत बहुत ही शानदार हुई है, जहां एक ओर गेहूं का सरकारी स्टॉक 57% बढ़कर 11.8 मिलियन टन तक पहुंच गया है जो 3 साल का सबसे ऊंचा स्तर है. वहीं, दूसरी ओर चावल का भंडार भी रिकॉर्ड 63.09 मिलियन टन पर पहुंच गया है, जो सरकारी लक्ष्य से 4 गुणा ज्यादा है. इन मजबूत आंकड़ों से कीमतों को स्थिर करने की उम्मीद तो जगी ही है. साथ ही, फूड सेफ्टी और एक्सपोर्ट की संभावनाओं को भी बढ़ावा मिला है.
महंगाई पर लगेगा अंकुश
FCI की शुरुआती गेहूं खरीद साल 2025 के लिए अच्छी रही है. पिछले कुछ सालों में फसल उत्पादन और सरकारी खरीद में आई कमी के चलते गेहूं और चावल के भाव में बढ़ोतरी दर्ज हुई थी, लेकिन अब भंडारण के बेहतर आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर रह सकती है. इससे महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलेगी और जरूरत पड़ने पर निर्यात की संभावना भी बढ़ सकती हैं.
पिछले साल के आखिर में कयास लगने शुरू हो गए थे कि भारत को 7 साल बाद पहली बार गेहूं आयात करना पड़ सकता है लेकिन अब मजबूत स्टॉक और बेहतर खरीद के चलते ऐसे सभी अटकलों पर फिलहाल विराम लगता नजर आ रहा है.
आम उपभोक्ता को मिलेगी राहत
गेहूं और चावल के रिकॉर्ड स्तर पर भंडारण का मतलब यह है कि घरेलू जरूरतें पूरी होती रहेगी और देश को निर्यात का अच्छा मौका मिल सकता है. बिना देश की खाद्य सुरक्षा को नुकसान पहुंचाए. गेहूं- चावल के मजबूत भंडारण ने भारत को एक सुरक्षित और स्थिर अनाज अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ाया है. इससे आम उपभोक्ता को राहत पहुंचेगी और सरकार को भी कीमत नियंत्रण और निर्यात रणनीति में लचीलापन मिलेगा.
