चंडीगढ़ | राजधानी चंडीगढ़ के सेक्टर- 29 के रहने वाले संजू शर्मा की, जो ट्राईसिटी (चंडीगढ़- पंचकूला- मोहाली) में “खिड़की वाला” के नाम से अपनी खास पहचान बना चुके है. कहते हैं निरंतर प्रयास करते रहिए, सफलता एक दिन आपके कदम अवश्य चूमेगी. देर से सही मगर मेहनत रंग जरुर लाती है. कुछ ऐसी ही कामयाबी की कहानी है.
कभी पेड़ के नीचे लगतीं थी रेहड़ी
संजू शर्मा (खिड़की वाला) ने बताया कि पिता सीता राम शर्मा ने साल 1978 में चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया Phase- 1 स्थित प्लॉट नंबर- 111 के साथ लगती दीवार के पास पेड़ के नीचे छोले- भटूरे की रेहड़ी से काम शुरू किया था. यहां प्लॉट की दीवार में एक खिड़की होती थी, जहां पिताजी अपना सामान रखते और ग्राहकों को छोले- भटूरे- चावल परोसते थे. यहीं से लोगों ने शर्मा परिवार को “खिड़की वाला” नाम से पहचान दी थी.
पिता जी की मधुरता और कर्मठ व्यवहार के न सिर्फ यहां छोले- भटूरे खाने वाले बल्कि प्लॉट मालिक भी कायल थे और इसी वजह से उन्होंने उस जगह का कभी किराया नहीं लिया. यही पर उन्होंने पूरी मेहनत, धैर्य और कुशल व्यावहारिकता के साथ अपने पिता का हाथ बंटाया. इस दौरान कई चुनौतियां भी झेलनी पड़ी, लेकिन उन्होंने अपने परिवार के कामकाज की बागडोर अपने हाथ लेकर इसे तेजी से आगे बढ़ाया.
छोले- भटूरे के दीवाने हुए लोग
आज उनके हाथ के बने छोले- भटूरे और चावल का स्वाद लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है. पूरा दिन उनके यहां ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है. यही कारण है कि संजू रेहड़ी से शुरू किए अपने इस काम की बदौलत आज इंडस्ट्रियल एरिया Phase- 1 स्थित कबाड़ी/ एमडब्ल्यू मार्केट में कीमती बूथ नंबर- 12 के मालिक बन चुके हैं.
उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा शहर में स्ट्रीट वेंडर एक्ट को फरवरी 2020 में लागू किया गया. नगर निगम ने विक्रेताओं की पहचान, पंजीकरण और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया शुरू की गई थी. इस योजना के तहत, नगर निगम ने विक्रेताओं की पहचान, पंजीकरण और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया शुरू की और सड़कों पर यहां- वहां खड़े रहने वाले रेहड़ी- फड़ी वालों को शहर में निश्चित स्थान पर जगह अलॉट करने की प्रक्रिया शुरू की.
संजू ने ठाना की जिस जगह से उनके परिवार को मजबूती मिली है, उसे छोड़ना सही नहीं. नतीजतन उन्होंने अपनी कमाई से अर्जित की गई धनराशि से कबाड़ी/ एमडब्ल्यू मार्केट के बूथ नंबर 12 को खरीदने का फैसला किया. संजू ने बताया कि उन्होंने बड़ी हिम्मत रखते हुए इस बूथ को 60 लाख रूपये में खरीदा था, लेकिन आज इसकी कीमत कहीं अधिक बढ़ चुकी है.
लस्सी से बढ़ी कई गुणा बिक्री
उन्होंने बताया कि गर्मी में तापमान बढ़ने पर खाने के सामान की बिक्री में गिरावट महसूस हुई, तो उन्होंने दुकान में स्पेशल “कुल्हड़ वाली” मीठी और नमकीन लस्सी को अपने मेन्यू में शामिल कर लिया. देखते- ही- देखते जो थोड़ी बहुत गिरावट आई थी, उससे कई गुना ज्यादा बिक्री होने लगी.
ग्राहकों से बात करने पर उन्होंने बताया कि सबसे विशेष बात ये है कि खिड़की वाला का स्वाद पहले दिन से लेकर आज तक एक जैसा है, कभी भी खाने की क्वांटिटी और क्वालिटी में अंतर नहीं आया. पिछले लगभग 35 सालों से आज भी नियमित तौर पर उनकी दुकान पर स्वादिष्ट छोले- भटूरे और लस्सी का स्वाद चखने आते हैं.
