पानीपत | हरियाणा में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने पानीपत रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स में 10 हजार टन प्रति वर्ष क्षमता वाला ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र स्थापित करने की घोषणा की है, जो भारत का अब तक का सबसे बड़ा ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट होगा.
2 साल में होगा चालू
IOC ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए लेवलाइज्ड कॉस्ट ऑफ हाइड्रोजन (LCOH) को अंतिम रूप दे दिया गया है. इस संयंत्र का उद्घाटन दिसंबर 2027 तक प्रस्तावित है और इसके चालू होते ही रिफाइनरी में प्रयोग हो रहे जीवाश्म ईंधन आधारित हाइड्रोजन को ग्रीन हाइड्रोजन से प्रतिस्थापित कर दिया जाएगा. इससे कार्बन उत्सर्जन को बड़े स्तर पर कम करने में मदद मिलेगी.
IOC चेयरमैन अरविंदर सिंह साहनी ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2025, डावोस (स्विट्जरलैंड) में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट अब सक्रिय प्रकिया में है. हमें इसके लिए बहुत अच्छी बोली लगाने वाले मिले हैं. टेंडर मूल्यांकन के अंतिम चरण में हैं और अगले महीने के पहले सप्ताह तक कार्यादेश जारी कर दिया जाएगा.
कार्बन उत्सर्जन में होगी भारी कटौती
ग्रीन हाइड्रोजन को पारंपरिक हाइड्रोजन की तुलना में कहीं अधिक पर्यावरण अनुकूलित माना गया हैं, क्योंकि इसे जल और नवीकरणीय ऊर्जा के जरिए उत्पन्न किया जाता है, जिससे ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन शून्य के करीब होता है.
इंडियन ऑयल का यह कदम भारत को वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगा. भारत की हरित ऊर्जा क्रांति की दिशा में यह प्रोजेक्ट महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा. IOC चेयरमैन ने बताया कि यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का हिस्सा है.
