हिसार | किसानों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है. हिसार स्थित चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने एक और नया कारनामा किया है. गेहूं, सरसों, बाजरा,धान आदि फसलों की उन्नत किस्म ईजाद करने वाले कृषि वैज्ञानिकों ने अब चना की नई किस्म HC- 7 विकसित की हैं. डॉ सुनिल कुमार, दलहन विभाग, कृषि वैज्ञानिक ने इस किस्म की खासियतों को साझा किया है.
बिजाई का उपयुक्त समय
डॉ सुनिल कुमार ने बताया कि चने की यह किस्म भारत के समस्त उत्तर-पश्चिम मैदानी क्षेत्रो में पछेती बिजाई (नवंबर के अंतिम सप्ताह से दिसंबर के प्रथम सप्ताह तक) एवम् सिंचित परिस्थितियों के लिए सिफारिश की गयी है. इसका पौधा घनी शाखाओं वाला, फैलावदार हल्का हरा तना एवं हल्की हरी पत्तियों वाला जिसकी आरंभिक शाखाएं लंबी व शेष शाखाए छोटी होती हैं.
उन्होंने बताया कि यह मध्यम अवधि ( 122-130 दिनों) में पकने वाली किस्म है. इस के दाने आकर्षक पीले रंग के व छोटे (14.0 ग्राम/ 100 बीज) होते हैं. इसकी औसत पैदावार 10 क्विटल प्रति एकड़ है और इसकी अधिकतम पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ तक ली जा सकती है. इसमें फली छेदक सुंडी का आक्रमण अपेक्षाकृत कम होता है. यह चने की मुख्य बीमारियों उखेड़ा, जड़ गलन और अंगमारी की रोग रोधी किस्म है.
यहां से हासिल करें बीज
इस वैरायटी की बीज आप HAU Hisar मे लगने वाले रबी कृषि मेले से सकते हो. यह मेला चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में 21-22 सितंबर, 2025 को लगेगा. कृषि मेले का आयोजन नया मेला ग्राउंड, HAU विश्वविद्यालय गेट नंबर 3, बालसमंद रोड, हिसार होगा.
