नई दिल्ली | आज के दिन अगर हम सबसे ज्यादा सम्मानजनक पेशे के बारे में बात करें तो यह शिक्षक (टीचर्स) का है. जी हां, टीचिंग कौन सबसे सम्मानजनक पेशा माना जाता है. एक शिक्षक बच्चों के भविष्य को निर्धारित करता है. शिक्षक बच्चों के भविष्य की नींव रखते हैं और यही बच्चे आगे चलकर देश का भविष्य बनते हैं. इस पेशे में सम्मान होने के साथ- साथ यह एक अच्छा करियर ऑप्शन भी है.

मिलता है शानदार सैलरी पैकेज
टीचिंग को मात्र एक सम्मानजनक पेशा ही नहीं, बल्कि एक अच्छा करियर ऑप्शन भी माना जा रहा है. विशेषतौर पर विदेशों में टीचर्स को न केवल सम्मान मिलता है बल्कि उन्हें शानदार सैलरी पैकेज भी दिया जाता है. कई देशों में टीचर्स हर साल करोड़ों रुपये तक कमाई सकते हैं. आज हम आपको दुनिया के कुछ उन देशों के बारे में बताने जा रहें है, जहां टीचर्स को सबसे ज्यादा सैलरी दी जाती है.
इन देशों में शिक्षकों को मिलती है शानदार सैलरी
जर्मनी (Germany): जर्मनी में जिस टीचर को 10 से 15 साल का अनुभव है उन्हें 55,000 से 67,000 यूरो सालाना सैलरी मिलती है. यह भारतीय रुपयों में लगभग 59 लाख से 72 लाख रुपये के बराबर है.
डेनमार्क (Denmark): डेनमार्क में सेकेंडरी टीचर्स को सालाना DKK 4,60,000 से 5,68,000 तक सैलरी मिलती है. भारतीय रुपयों में यह लगभग 55 लाख से 68 लाख रुपये के समान है.
स्विट्जरलैंड (Switzerland): स्विट्जरलैंड में भी टीचर्स को शानदार सैलरी मिलती है. यहां टीचर्स को सालाना CHF 80,000 से 99,000 तक दिए जाते हैं, जो करीबन 72 लाख से 90 लाख रुपये के बराबर है.
दक्षिण कोरिया (South Korea): दक्षिण कोरिया में टीचर्स को हर साल KRW 70 से 90 मिलियन तक सैलरी दी जाती है. यह भारतीय रुपयों में करीबन 53 लाख से 68 लाख रुपये के बराबर है.
ऑस्ट्रिया (Austria): ऑस्ट्रिया में टीचर्स को हर साल 55,000 से 60,000 यूरो तक सालाना सैलरी प्रदान की जाती है. भारतीय रुपयों में यह लगभग 59 लाख से 65 लाख रुपये ke बराबर बनती है.
लक्जमबर्ग (Luxembourg): लक्जमबर्ग टीचर्स को सबसे ज्यादा सैलरी देने वाले देशों में पहले नंबर पर है. यहां अनुभवी प्राइमरी और सेकेंडरी टीचर्स को हर वर्ष 80,000 से 1,15,000 यूरो तक सैलरी दी जाती है. भारतीय रुपयों में यह करीबन 86 लाख से 1.24 करोड़ रुपये के बराबर है.