हरियाणा से दक्षिणी-पश्चिमी मानसून लौटने की तैयारी में, जाने आगे का मौसम

हिसार I हरियाणा में मौसम में तेज़ी से बदलाव शुरू हो गया है. अब प्रदेश से दक्षिणि-पश्चिमि मानसून जाने लगा है. पिछले सालों की अपेक्षा इस साल मानसून 15 प्रतिशत कम वर्षा के साथ वापस लौट गया है. हरियाणा में पन्द्रह शहर ऐसे भी हैं जहाँ इस बार वर्षा बहुत ही कम हुई है. इनमे मुख्य रूप से महेन्द्रगढ़, पंचकूला, भिवानी, रोहतक शामिल हैं. वर्षा के मामले में हरियाणा की स्थिति ठीक नही है.

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क्या कहते हैं आंकड़े
हरियाणा में 26 जून 2020 को दक्षिणी-पश्चिमी मानसून ने एंट्री की थी. लेकिन इस बार मानसून कुछ खास वर्षा नही लेकर आया. जुलाई महीने में सामान्य की तुलना में 6 प्रतिशत ज्यादा वर्षा हुई, जिससे किसानों में उम्मीद पैदा हो गई कि इस वर्ष फसल बहुत अच्छी होगी. लेकिन अगस्त और सेप्टेंबर के महीने में वर्षा का बुरा हाल देखकर उनकी सभी उम्मीदें समाप्त हो गई. आंकड़ों के अनुसार इस साल सामान्य वर्षा 443.6 मिमी० की बजाए 377.1 मिमि वर्षा दर्ज की गई है. इसके साथ ही इस बार मॉनसून की वर्षा असमान हुई है जिसकी वजह से प्रदेश के 15 जिलों में सामान्य से भी बहुत कम वर्षा दर्ज हुई.

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इन जिलों में हुई कम वर्षा

पंचकूला- 65 % कम रोहतक- 57 % कम
भिवानी- 43 % कम महेंद्रगढ़- 37 % कम
अंबाला- 36 % कम जींद- 29 % कम
रेवाडी- 26 % कम पलवल- 25 % कम
पानीपत- 23 % कम हिसार- 19 % कम
यमुनानगर- 17 % कम सोनीपत- 11 % कम
मेवात- 9 % कम झज्जर- 3 % कम
फरीदाबाद- 2 % कम

मौसम में बदलाव 4 अक्टूबर तक
डॉ मदन खीचड़ जो चौधरी चरण सिंह हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के कृषि मौसम विभाग के अध्यक्ष हैं, उन्होंने बताया है कि जैसा कि दक्षिणी-पश्चिमी मानसून के लौटने का अनुमान है और जम्मू व कश्मीर पर पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव की वजह से हरियाणा में 4 अक्तुबर तक मौसम में प्रभावशाली बदलाव देखा जा सकता है. इन दिनों हवाएं उत्तर दिशा से पश्चिम दिशा की ओर चलने व कभी कभी थोडे थोड़े बदल आने का भी अनुमान है. फलस्वरूप दिन और रात दोनों वक्त तापमान थोड़ा नीचे गिर सकता है.

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Sahil Maurya
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