ये है भारत का पहला ज्योतिर्लिंग, 600 साल से अधिक पुराना इतिहास; सावन में उमड़ती लोगों की भीड़

ज्योतिष डेस्क | हिंदू धर्म में भगवान शिव से जुड़े 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख शास्त्रों में मिलता है. भारत में जिन स्थानों पर शिव के यह ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं, वहां आज भव्य शिव मंदिर बन चुके हैं, जिनके प्रति हिंदू धर्म को मानने वाले भक्तों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का जिक्र शिव पुराण के रुद्रसंहिता में मिलता है. सावन का महीना शुरू हो चुका है. आज सावन का तीसरा दिन यानी 01 अगस्त 2026 है. इस मौके पर सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहले आने वाले सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के बारे में जानते हैं.

Somnath Temple

द्वादश ज्योतिर्लिंगों को लेकर शिव पुराण में एक श्लोक भी मिलता है, जिसमें सौराष्ट्र के सोमनाथ, श्रीशैल के मल्लिकार्जुन, उज्जैन के महाकाल, ओंकारेश्वर के अमलेश्वर, परली के वैद्यनाथ, डाकिनी के भीमाशंकर, सेतुबंध के रामेश्वर, दारुकावन के नागेश्वर, वाराणसी के विश्वेश्वर, गौतमी तट के त्र्यंबकेश्वर, हिमालय के केदारनाथ और शिवालय के घुश्मेश्वर का उल्लेख किया गया है.

भारत का पहला ज्योतिर्लिंग

मान्यता है कि जो व्यक्ति सुबह- शाम इन ज्योतिर्लिंगों का स्मरण करता है, उसके सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं. गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में वेरावल बंदरगाह के पास प्रभास पाटन नाम की जगह अरब सागर के तट पर बसी है और यहीं भारत का पहला ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ था. इसी स्थान पर भगवान शिव अग्नि स्तंभ के रूप में प्रकट हुए थे. मंदिर का इतिहास 649 ईसा पूर्व से भी पुराना बताया जाता है, जबकि इसका मौजूदा स्वरूप साल 1951 में नए सिरे से बनाया गया. मंदिर के उत्तरी हिस्से में शिव कथा से जुड़े रंगीन चित्र भी बने हुए हैं.

पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्रदेव यानी सोमराज ने सबसे पहले सोमनाथ में स्वर्ण का मंदिर बनवाया था. इसके बाद रावण ने इसे चांदी से, भगवान कृष्ण ने लकड़ी से और भीम ने पत्थर से पुनर्निर्मित करवाया. मंदिर के गर्भगृह में एक विशाल काला शिवलिंग स्थापित है, जो देश के 12 सबसे पवित्र शिव मंदिरों यानी ज्योतिर्लिंगों में गिना जाता है. इतिहास में इस मंदिर पर कई बार आक्रमण भी हुए. साल 1025 के आखिर में वर्तमान अफगानिस्तान के आक्रमणकारी महमूद गजनवी ने इस मंदिर पर हमला बोला था. उस दौर में मंदिर इतना समृद्ध था कि वहां करीब 300 संगीतकार, 500 नर्तकियां और 300 नाई काम किया करते थे.

यह भी पढ़े -  घर में रुद्राभिषेक करने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, तभी मिलेगा भगवान शिव का आशीर्वाद

शिवरात्रि में उत्सव

दो दिनों तक चले युद्ध के बाद महमूद ने शहर और मंदिर पर कब्जा जमा लिया, जिसमें अनुमानित 70 हजार से अधिक रक्षक मारे गए थे. इसके बाद उसने मंदिर की अपार संपत्ति लूटकर पूरी संरचना को ध्वस्त कर दिया. यहीं से विनाश और पुनर्निर्माण का सिलसिला शुरू हुआ जो सदियों तक चलता रहा. मंदिर को इसके बाद 1297, 1394 और आखिरकार 1706 में मुगल शासक औरंगजेब के दौर में भी नुकसान झेलना पड़ा. सोमनाथ मंदिर के दर्शन के लिए अक्टूबर से फरवरी के महीने को सबसे बेहतर समय माना जाता है. यह मंदिर पूरे साल श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है. शिवरात्रि और कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर यहां विशेष धूमधाम के साथ उत्सव मनाया जाता है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। Haryana E Khabar किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है.

Avatar of Sanjukta Pandit
Sanjukta Pandit
View all posts

मेरा नाम संयुक्ता पंडित है. मै हरियाणा ई खबर में बतौर एडिटर के पोस्ट पर लगभग 4 सालों से काम रही हूँ. मेरी हमेशा कोशिश रहती है आप लोगो तक ब्रेकिंग न्यूज़ जल्द से जल्द अपडेट करूं और न्यूज़ में कोई व्याकरण की गलती न हो.