सीएम खट्टर का बड़ा बयान, MSP पर बाजरा की नहीं होगी बिक्री तो हरियाणा सरकार प्रति क्विंटल पर देगी इतनी राशि

चंड़ीगढ़ | हरियाणा में यदि बाजरा 2350 रुपये प्रति क्विंटल से कम में बेचा जाता है तो सरकार भावांतर भरपाई योजना के तहत किसानों को 450 रुपये प्रति क्विंटल की दर से उपलब्ध कराएगी. राज्य सरकार ने यह फैसला न्यूनतम समर्थन मूल्य और बाजार मूल्य के बीच के अंतर को कम करने के लिए लिया है.

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मंडियों में फसलों की उठान हुई सुचारू

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि प्रदेश की मंडियों में धान और बाजरे सहित अन्य फसलों की खरीद सुचारू रूप से चल रही है. सीएम ने कहा कि 6 से 10 अक्टूबर तक बारिश की भविष्यवाणी की गई थी लेकिन 11 अक्टूबर को भी राज्य के कई जिलों में बारिश हुई. किसान अपनी फसल की कटाई करते हैं और बारिश की संभावना से पहले ही उन्हें मंडियों में ले जाते हैं. शुरुआत में फसलों की खरीद से लेकर उठान तक में कुछ दिक्कत थी लेकिन अब इन समस्याओं को दूर कर दिया गया है और राज्य की मंडियों में फसलों की उठान भी सुचारू हो गई है.

हरियाणा में खरीफ सीजन की फसलों की खरीद 1 अक्टूबर से शुरू हो गई है. सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत दिए जाने वाले बाजरा के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 1.60 लाख टन की खरीद करेगी बाकी बाजरा किसानों को मंडियों में बेचना पड़ सकता है. यह बाजरा हैफेड द्वारा खरीदा जाएगा. पिछले साल भी राज्य सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर बिकने वाले बाजरे के रेट का मुआवजा दिया था. दक्षिण हरियाणा में बाजरा का उत्पादन बहुत अधिक है.

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केंद्र सरकार ने अगले साल यानी 2023 को मोटे अनाज के अंतर्राष्ट्रीय वर्ष के रूप में मनाने का फैसला किया है इसलिए सरकार इसे आम लोगों के आहार का हिस्सा बनाना चाहती है लेकिन कई मौके ऐसे भी होते हैं. जब बाजार में बाजरे का भाव एमएसपी से कम होता है, जिसके खिलाफ सरकार ने भावांतर भरपाई योजना लागू कर इसे हटा दिया है.

केंद्र सरकार का मानना ​​है कि बाजरे की फसल की उत्पादन लागत 1,268 रुपये प्रति क्विंटल है. बाजरे को पिछले साल खुले बाजार में 1,300 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल में बेचा गया था, जिसकी भरपाई सरकार ने की थी. बाजार में रेट कम होने से सरकार पर पूरे बाजरा को एमएसपी पर खरीदने का दबाव है, ऐसे में हरियाणा सरकार बाजरे की खेती को हतोत्साहित कर रही है.

इन जिलों में होती है बाजरा की खेती

हैफेड ने हाल ही में बाजरा से बने उत्पाद भी लॉन्च किए हैं ताकि इस बाजरा का सेवन किया जा सके. बाजरे के स्थान पर तिलहन और दलहन की खेती के लिए किसानों को प्रति एकड़ 4,000 रुपये की सहायता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है. हरियाणा में बाजरा की खेती चरखी दादरी, भिवानी, रेवाड़ी, झज्जर, महेंद्रगढ़, नूंह और हिसार में की जाती है

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Pravesh Chauhan
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मेरा नाम प्रवेश चौहान है. मीडिया लाइन में पिछले 4 वर्ष से काम कर रहा हूँ. मैंने पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की है.