चंडीगढ़ | पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की तरफ से एक फैसला सुनाया गया व इसमें हरियाणा सरकार और संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है कि वर्ष 2019 में चयनित और पिछले पांच सालों से सेवा दे रहे क्लर्कों को उनके पदों पर न्यायसंगत रूप से बहाली दी जाए. यह निर्णय जस्टिस जगमोहन बंसल की सिंगल बेंच ने दिया.
क्लर्क से जुड़ा है मामला
साल 2019 में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने 964 लोअर डिवीजन क्लर्क को निकाल दिया था. यह मामला उन्ही से संबंधित है. चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अनेक अभ्यर्थियों ने नियुक्ति लेकर कार्यभार भी ग्रहण कर लिया था, मगर कुछ समय बाद मेरिट लिस्ट में संशोधन किया गया. इस संशोधन की वजह से कुछ अभ्यर्थियों के नाम लास्ट से हटा दिए गए, जिसके चलते उन्हें सर्विसेज से बाहर करने की प्रक्रिया की शुरुआत हुई.
उम्मीदवारों का समायोजन
29 मई 2024 को हाई कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश में साफ किया था कि चूंकि अभी तक सभी 964 पदों पर नियुक्ति नहीं की गई है, ऐसे में जिन योग्य उम्मीदवारों को हटाया गया है, उन्हें उसी सिलेक्शन प्रोसेस के अंतर्गत रिक्त पदों में समायोजित किया जाए. समायोजन सिर्फ उन्हीं रिक्तियों पर हो, जो इसी चयन प्रक्रिया से जुड़े हो. इस आदेश के बाद भी सरकार और उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) ने फिर से विज्ञापन जारी कर नए सिरे से भर्तियों की प्रक्रिया शुरू कर दी.
इस निर्णय के विरुद्ध याचिकाकर्ताओं ने एक बार फिर अदालत का दरवाजा की शरण ली. सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया कि 26 याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति की जा चुकी है, 12 अन्य को जल्द नियुक्ति दे दी जाएगी. इसके पश्चात, 6 अभ्यर्थियों को अयोग्य करार दिया गया था.
