चरखी दादरी की बेटी स्वाति ने UPSC में रचा इतिहास, ग्रामीण अंचल से निकल कर पाया यह मुकाम

चरखी दादरी | हरियाणा के चरखी दादरी जिले को विश्व पटल पर एक अलग ही पहचान मिली है. ऐसा इसलिए क्योंकि देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अपने खेल के दम पर धाक जमाने वाली विनेश फोगाट इसी जिले की ही रहने वाली है. अब एक बार फिर से यहां का नाम देश भर में चमक उठा है. कारण जिले की बेटी स्वाति फौगाट है. दरअसल, स्वाति ने UPSC परीक्षा में 306वां रैंक हासिल कर अपने परिवार और प्रदेश का मान बढ़ाने का काम किया है.

Swati Phogat

गांव में हुआ स्वागत

गुरुवार को चरखी दादरी के गांव मोड़ी में ग्रामीण और परिवारजनों ने स्वाति का भव्य स्वागत किया. इस मौके पर परिवार जन काफी भावुक और उत्साहित नजर आए. उन्होंने अपनी बेटी की सफलता पर खुशी जताते हुए बाकी अभिभावकों को भी अपने बच्चों की परवरिश पर ध्यान देने का संदेश दिया. इस दौरान भाजपा के दादरी विधायक सुनील सांगवान व बाढड़ा विधायक उमेद पातुवास भी मौजूद रहे. उन्होंने स्वाति के उज्जवल भविष्य की कामना की.

गांव से मिली प्रारंभिक शिक्षा

मिली जानकारी के अनुसार, गांव के स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद स्वाति ने स्पोर्ट्स स्कूल राई से 12वीं की परीक्षा पास की. उसके बाद, उन्होंने राजधानी दिल्ली के कमला नेहरू कॉलेज से ज्योग्राफी ऑनर्स में बीए की डिग्री प्राप्त की. कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से डिस्टेंस एजुकेशन से एमएससी ज्योग्राफी करने के बाद नेट और जेआरएफ क्वालीफाई किया. वर्तमान में वह जयपुर से पीएचडी कर रही है. अब उन्होंने यूपीएससी द्वारा आयोजित की गई सिविल सेवा परीक्षा में 306वां रैंक हासिल किया.

युवाओं को दिया यह सन्देश

अपनी इस उपलब्धि पर उत्साहित स्वाति फौगाट ने बताया कि लड़कियों को अगर सही मौका दिया जाए तो वह हर फील्ड में बेहतरीन प्रदर्शन कर सकती हैं. खेल हो या पढ़ाई आज बेटियों ने हर फील्ड में अपनी धाक जमाई है. उन्होंने युवाओं को भी प्रेरणा दी कि हमेशा मेहनत करते रहें. मेहनत कभी बेकार नहीं जाती. कभी ना कभी जरूर सफलता मिलती है.

28 वर्षीय स्वाति के पिता रमेश फौगाट डीपीई पद से रिटायर्ड हैं और उनकी माता सुदेश देवी गृहणी हैं. उनके छोटे भाई जतिन फौगाट नूंह के नल्हड़ कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं. पिता रमेश फौगाट ने कहा कि उनके पिताजी हमेशा कहते थे कि उनकी पोती एक दिन उनका नाम जरूर रोशन करेगी. हमें बेटियों को किसी भी तरह से कम नहीं समझना चाहिए. यदि उन्हें मौका मिले तो वह जरूर परिवार, प्रदेश और देश का नाम रोशन करती हैं.

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Nisha Tanwar
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